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भारत परिक्रमा

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उड़ीसा मे रथ यात्रा शुरू हो चुकी थी जिसमे शामिल होने की मेरी तीव्र लालसा थी। इसी प्रकार मै अपनी यात्रा का प्लान भी बना रहा था।  मेरा यात्रा प्लान लखनऊ  देवघर कलकत्ता घूमते हुए जगन्नाथ पूरी में रथ यात्रा में शामिल होने का था, मुझे उम्मीद नहीं थी, कि ये यात्रा इतनी लंबी हो जायेगी। ये यात्रा कुल मिलाकर 8500km की हो गयी।  इस यात्रा के दौरान हमने भारत के 14 प्रदेशो का सफर तय किया। अलग अलग प्रदेशो के मंदिर हमारे तीर्थ , धाममंदिरो की भव्यता और उनकी लोक संस्कृति को देखा। जो कि मेरे लिए एक नया अनुभव था।  कुल मिलाकर यह मेरी आध्यामिक यात्रा रही। यह मेरे जीवन की सबसे लंबी यात्रा रही।इस यात्रा को मैंने भारत परिक्रमा नाम दिया। 

चूड़धार यात्रा 2

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चूड़धार पार्ट २   चूरधार चोटी    हमारी 13 किलोमीटर की ट्रैकिंग के बाद हम लोग पहुँच गए तीसरी नामक स्थान पर अब यहाँ पर लगभग जंगल खत्म हो गया था। चूरधार अब 5 km बचा था। तो जंगली जानवरों का डर कुछ कम हो गया था। अब रास्ता और भी खतरनाक हो गया था । क्यों कि अब यहाँ से बर्फ मिलनी शुरू हो गयी थी। इस ट्रेकिंग पर मुझे बहुत ही आनंदआ रहा था। अब भूख भी लगने लगी थी। यहाँ पर राजीव भाई ने काजू बादाम भी खिलाए थे। और अक्षय भाई ने मैगी भी खिलवाई थी। जो की वो अपने घर से ही लाए थे।और भी कई मित्र थे, जो मुझको खिलाते पिलाते ले जा रहें थे, थकान बहुत हो गयी थी, मेरे पास एक ही बैग था जो मुझे अब बहुत भारी लग रहा था। ट्रेकिंग के दौरान अनमोल ने बहुत साथ दिया। वह मेरी थकान भरी शक्ल देख कर ही बैग पकड़ लेता और आगे आगे चलने लगता था। उसका वजन 50 के आसपास था और मेरा 75 , यही कारण था। कि मुझे ट्रेक के दौरान तकलीफ बढ़ रही थी। रास्ते में कई छोटे 2 झरने मिल रहें थे जहां से पानी मिल जाता था। ट्रेक के दौरान पानी बहुत काम आ रहा था    बहुत सारे बर्फ के गिलेसियर बने पड़े थे बर्फ पर चलना मेरे लिए आसान नहीं...

चूरधार यात्रा हिमाचल

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मै भोले बाबा का परम भक्त हूं। और बाबा की कृपा से हमको भोले बाबा के प्रसिद्ध स्थानों को घूमने का सौभाग्य प्राप्त होता रहा है ।आज आपको लेकर चलते हैं, हिमाचल प्रदेश में चूरधार की यात्रा पर चूरधार भोले बाबा का स्थान है बहुत ही खूबसूरत जगह है।  कभी जीवन में एक बार भी कहीं घूमने का मौका मिले तो मै इस जगह पर जाकर निराश नहीं होऊंगा वाकई में भोलानाथ ने शानदार खूबसूरती यहां बिखेरी है।  हम चूरधार धरतीपुत्र अक्षय के साथ गए थे इस यात्रा का प्रोग्राम अक्षय ने ही बनाया था , प्रोग्राम जनवरी से बन रहा था और फिर फरवरी मार्च  के वाद 27 अप्रैल19 को चूरधार का प्रोग्राम तय हुआ। इस यात्रा पर मेरा एक और मित्र अनमोल मेरे गृह नगर से मेरे साथ चलने के लिए तैयार हो गया । अब हम उत्तरप्रदेश से 4लोग अंबाला से अक्षय भाई , राजीव जी बदायूं, पवन भाई रेवाड़ी , अनमोल , कई लोग चूरधार चलने के लिए सुवह 7 अंबाला रेलवे स्टेशन पहुंच चुके थे।  कुछ ही समय में हम लोग अपनी टीम के साथ गाड़ी में सवार होकर अंबाला से नोहराधार के लिए चल दिए, लगभग 60 km वाद पहाड़ी रास्ता शुरू हो चुका था। अक्षय भाई का प्लान के मुताबिक हम लो...

चंद्रभागा बीच कोणार्क

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चंद्रभागा समुद्री तट कोणार्क के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर से तीन किमी दूर स्थित है। यहां ठंडी हवा की सरसराहट और साफ पानी के साथ तट की प्राकृतिक सुंदरता हमको आकर्षित कर गई। यह भीड़भाड़ मुक्त एक शानदार समुद्री तट है। आप कोणार्क मंदिर जाते हैं, तो कुछ समय यहां रुककर इस समुद्री तट की सुंदरता को जरूर देखे।  सबसे मुख्य बात यह है,चंद्रभागा बीच एक आदर्श, शानदार उड़ीसा के नामी समुद्री तटों में से एक है।  यह बीच एक दम शानदार और शांत है आप यहाँ पर आकर शांति से घूम सकते है , बैठ सकते है। यह भीड़भाड़ वाला बीच नहीं है। शाम के समय यहाँ पर कुछ भीड़ हो जाती है। अगर आप यहां तक आते ही हो तो चंद्रभागा बीच को जरूर देखे और यहाँ का नारियल पानी जरूर पिए। चंद्रभागा बीच पर मै अपनी माँ के साथ गया था।  चंद्रभागा बीच हमारी माँ  । 

रथ यात्रा उड़ीसा

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भारत के उड़ीसा राज्य के समुद्र तटवर्ती शहर पुरी में भगवान जगन्नाथ अर्थात श्रीकृष्ण को समर्पित श्री जगन्नाथ मंदिर को हिन्दुओं के चार धामों में से एक माना जाता है।  जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत अर्थात ब्रह्माण्ड के स्वामी होता है। इस जगत के स्वामी की नगरी ही जगन्नाथपुरी अथवा पुरी कहलाती है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। और मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा मुख्य देव के रूप में स्थापित हैं।    पौराणिक मान्यता के अनुसार जगन्नाथ प्रभु के दर्शन के लिए जाते समय हम सभी को अरुणा खंभा को सर्वप्रथम नमस्कार करना चाहिए क्योंकि यह सूर्य भगवान के सारथी है।  जगन्नाथ मंदिर और सामने अरुणा खंबा के दर्शन करें।   सनातन धर्म में चार सबसे बड़े धाम बताए गए हैं जो हमारे देश की चारों दिशाओं में बसे हैं। उत्तर दिशा में बदरीनाथ हैं, दक्षिण दिशा में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारिका और पूर्व में जगन्नाथ पुरी। ऐसी मान्यता है कि इन चारों धामों में भगवान का साक्षात् वास है और इनके दर्शन से कई जन्मों के पाप-ताप दूर हो जाते हैं और मुक्ति की प्राप्ति होती है। ...

हरिद्वार की छोले पूड़ी

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हरिद्वार की छोले पूड़ी   आज मैंने हर की पौड़ी घाट #हरिद्वार के पास  दूध के साथ छोलेपूड़ी के चटपटे स्वाद का आनंद लिया।  बहुत शानदार और लजीज स्वाद था हरिद्वार आने के बाद तीखे-चटपटे और मसालेदार खाने का लुत्फ तो लेना ही चाहिए।  हरिद्वार में हर की पौड़ी घाट से लगी हुई पूड़ी सब्जी की दुकानें है,   यहाँ के छोले पूड़ी सब्जी ,लस्सी का स्वाद तो विश्वविख्यात है।  एक बार जरूर चखे।  लस्सी 40रु  4पूड़ी छोले सब्जी 70 रु 

रथ यात्रा जगन्नाथ पुरी उड़ीसा

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सनातन धर्म में जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा का  बहुत अधिक धार्मिक महत्व है । इस रथ यात्रा में देश विदेश से लोग जगन्नाथ महाप्रभु के रथों को खींचने आते है ।इस रथ यात्रा में महाप्रभु जगन्नाथ ,भाई बलभद्र और बहन  सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलते है।और गुंडिचा मंदिर जाते है। यह वही मंदिर है। जहाँ विश्वकर्मा जी में तीनो देव प्रतिमाओं का निर्माण  किया था ।      रथ यात्रा के समय सारा आकाश जय जगन्नाथ के नारो से गूंज उठता है । ईस रथ यात्रा में पारंपरिक ,सांस्कृतिक , धार्मिक सहिष्णुता का समन्वय देखने को मिलता है । 🚩स्कन्द पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि रथ-यात्रा में जो व्यक्ति श्री जगन्नाथ जी के नाम का कीर्तन करता हुआ गुंडीचा नगर तक जाता है वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है। जो व्यक्ति श्री जगन्नाथ जी का दर्शन करते हुए, प्रणाम करते हुए मार्ग के धूल-कीचड़ आदि में लोट-लोट कर जाते हैं वे सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम को जाते हैं। जो व्यक्ति गुंडिचा मंडप में रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम और सुभद्रा देवी के दर्शन दक्षिण दिशा को आते हुए करते हैं वे मोक्ष को प्राप्त ह...