चूड़धार यात्रा 2
चूड़धार पार्ट २
चूरधार चोटी
हमारी 13 किलोमीटर की ट्रैकिंग के बाद हम लोग पहुँच गए तीसरी नामक स्थान पर अब यहाँ पर लगभग जंगल खत्म हो गया था। चूरधार अब 5 km बचा था। तो जंगली जानवरों का डर कुछ कम हो गया था। अब रास्ता और भी खतरनाक हो गया था । क्यों कि अब यहाँ से बर्फ मिलनी शुरू हो गयी थी। इस ट्रेकिंग पर मुझे बहुत ही आनंदआ रहा था। अब भूख भी लगने लगी थी। यहाँ पर राजीव भाई ने काजू बादाम भी खिलाए थे। और अक्षय भाई ने मैगी भी खिलवाई थी। जो की वो अपने घर से ही लाए थे।और भी कई मित्र थे, जो मुझको खिलाते पिलाते ले जा रहें थे, थकान बहुत हो गयी थी, मेरे पास एक ही बैग था जो मुझे अब बहुत भारी लग रहा था। ट्रेकिंग के दौरान अनमोल ने बहुत साथ दिया। वह मेरी थकान भरी शक्ल देख कर ही बैग पकड़ लेता और आगे आगे चलने लगता था। उसका वजन 50 के आसपास था और मेरा 75 , यही कारण था। कि मुझे ट्रेक के दौरान तकलीफ बढ़ रही थी। रास्ते में कई छोटे 2 झरने मिल रहें थे जहां से पानी मिल जाता था। ट्रेक के दौरान पानी बहुत काम आ रहा था
बहुत सारे बर्फ के गिलेसियर बने पड़े थे बर्फ पर चलना मेरे लिए आसान नहीं था मैं पहली बार बर्फ पर चल रहा था। ट्रेक बहुत खतरनाक था। अगर जरा सा चूक गए तो समझो एक हजार फीट गहरी खाई में पहुंच जाते इस लिए बर्फ से बने गिलेशियर पर बहुत ही सावधानी से चलना था।कोई रिस्क नही l हम लगभग 11000 फीट की ऊंचाई पर थे यहाँ से चूरधार चोटी दिख रही थी। और पहाड़ों पर बर्फ भी चोटी यहां से लगभग चारपाच km और दूर लग रही थी।
बर्फ से लदे इस पहाड़ नुमा गिलेशियर को इस तरह से पार करना मेरे लिए एक नया अनुभव था यह बहुत ही सुंदर दृश्य था। दूसरी तरफ एक हजार फीट गहरी खाई थी। अगर यहाँ पर चूक होती तो नजारा कुछ और हो सकता था मै तो बस भोलेनाथ का नाम लेकर आगे बढ़ रहा था। और सावधानी पूर्वक चल रहा था। मेरे आगे अनमोल चल रहा है यहाँ भी मै सबसे पीछे चल रहा हूँ आप देख सकते है।
इसको को पार कर हमको आगे बढ़ना था ।सुबह से चले चले अब शाम हो चली थी । अब रास्ता बड़े बड़े पत्थर और गिलेसियर का ही रह गया था ।यहाँ पर पहुँच के एक अलग ही आनंद आ रहा था। और हम लोग गिलेसियर को पार कर भोले के दरबार की तरफ बढ़ रहे थे।अब चूरधार चोटी भी दिख रही थी। दूर से ही भोले के दर्शन हो रहें थे। लगभग शाम के 5 बज गए थे। अभी भी कई बड़े बड़े पठारों को पार कर चूरधार तक पहुचना था। यहाँ से चूरधार चोटी पर शिव की प्रतिमा सामने दिख रही थी। सुवह 6 बजे से चलकर लगभग शाम को 5 बजे कठिन ट्रैकिंग करके हम लोग बाबा के दरबार मे पहुँच गए। अब हम सभी १३०००फीट की ऊँचाई पर थे। हर तरफ बर्फ ही बर्फ थी। भोले के दर्शन कर सभी पीड़ा दूर हुई। भोले बाबा का जलाभिषेक का मन हुआ। पर यहाँ बर्फ ही बर्फ थी। तो बाबा का बर्फ से अभिषेक किया पर बाबा की कृपा से हमको चूड़धार महादेव के दर्शन हुए ।






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