केदारनाथ यात्रा 2022
8 /7/22 को शाहजहाँपुर रेलवे स्टेशन से इलाहाबाद हरिद्वार ट्रेन से हम और शिवांग भाई बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिये सुबह 9 बजे निकले। निर्धारित समय पर ट्रेन आ गई। आराम से सीट मिल गई... हम दोनों सीट पर बैठ गए..,
कुछ ही समय में ट्रेन चल दी... गर्मी बहुत ज्यादा थी। एक घंटे बाद हम बरेली पहुँच गए। यहां पर मैंने शिवांग भाई को बताया कि मेरा चैम्बर रेलवे स्टेशन के बहुत पास है, 2 मिनट का रास्ता है। मैं यहीं प्रैक्टिस करता हूँ। फिर कुछ ही देर में ट्रेन चल दी। लगभग दो घंटे बाद ट्रेन मुरादाबाद पहुँच गई।
सुबह -2 हम दोनों लोग घर से कुछ खाकर नहीं आए थे तो अब भूख लगने लगी थी। मुरादाबाद स्टेशन पर पानी की एक बोतल लेकर मैं ट्रेन में आकर बैठ गया। कुछ ही समय बाद मैंने और शिवांग भाई ने खाना खाया।शिवांग भाई द्वारा लाया गया खाना बहुत ही स्वादिष्ट और लजीज था,।
अब ट्रेन में मुरादाबाद के बाद हमारे डिब्बे में भीड़ बढ़ने लगी तो सीट बदलकर दूसरे डिब्बे में बैठ गए.. यह डिब्बा पूरा खाली था मात्र 2,4 सवारी ही थी। कुछ देर
में लगभग शाम 4 बजे ट्रेन ने हमको हरिद्वार पहुँचा दिया ।
हर हर गंगे करते हुए हम दोनों पैदल ही हर की पौड़ी घाट पर पहुँच गए। इस समय घाट पर बहुत गर्मी व उमस थी पसीने से तर बतर हो चुके थे। कुछ ही समय में हर की पौड़ी घाट पर पहुँच गए।
गंगा जी में शिवांग भाई और मैं लगभग 30 मिनट तक नहाए, गंगा स्नान के बाद थोड़ी ठंड़क महसूस हुई ,बहुत अच्छा लगा ,कलेजा तक ठंडा हो गया। हम लोगों ने कपड़े पहने और फिर फोटोग्राफी शुरू कर दी। लगभग आधे घंटे तक खूब फ़ोटो वीडियो बनाने के बाद प्लान बनाया...कि कुछ खा पीकर ऋषिकेश चलते हैं। ऋषिकेश में होटल लेकर नाईट स्टे करेंगे।
कुछ देर बाद जब हम लोग जूता स्टैंड के पास पहुँचे तो शिवांग भाई के जूते चोरी हो गए ,शिवांग भाई ने बताया लगभग 3000 के थे, 4से 5 बार ही पहने थे कुछ देर जूता शोक के बाद हम लोग चाय पीने निकले।
गंगा मंदिर से बिल्कुल सीधे 100 मीटर चलकर साइड में एक चाय वाली दुकान है। वहीं जाकर हमने चाय पी और अपने घर से लाई हुई पूरी सब्जी खाई, शिवांग भाई को जबरदस्ती खाना खिला दिया मना कर रहे थे। यहां पर हम दोनों ने दो -दो चाय पी।चाय बढ़िया थी उसकी चाय की तारीफ कर दी तो उसने 5 रु प्रति चाय और बढ़ा दिए। वैसे सबको 10 की ही पिला रहा था। चाय पूरी के बाद फिर ऋषिकेश के लिये बैग पैक कर दिया।शाम हो चली थी,अब हम लोग धीरे धीरे गंगा घाटों पर घूमते हुए हर की पौड़ी घाट से ऋषिकेश वाली रोड की तरफ जा रहे थे। खूब ठंडी -2 हवा चल रही थी। हम लोग 45 DT से आए थे वाकई बहुत अच्छा लग रहा था। सामने माँ मनसा देवी मंदिर दिख रहा था। अब यहां पर आरती का समय हो चला था तो भीड़ बढ़ने लगी थी। हम लोग फ़ोटो और वीडियो बनाते हुए चल रहे थे। कुछ ही समय बाद हम ऋषिकेश रोड पर पहुँच गए, एक ऑटो वाले से बात की तो 90 रु में दोनों को ऋषिकेश छोड़ने को तैयार हो गया। अंधेरा हो चला था, कुछ ही देर में 1 घण्टे बाद हम लोग ऋषिकेश पहुँच गए।
ऋषिकेश पहुँच कर ऑटो वाले ने स्टैंड से 1 किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया और बोला हम आगे नहीं जायेंगे चालान हो जाएगा। वहीं पर उतर हम लोगों ने होटल देखने की तैयारी शुरू कर दी। 1 घंटे तक रूम देखने के बाद जब कोई होटल न मिला तो गुरुद्वारा में रात बिताने की सोची। गुरुद्वारा पहुँचकर सामान रख कर मैं और शिवांग भाई रात 9 बजे रामझूला तक घूमने चल दिये।
रात में कुछ ही समय में हम लोग राम झूला पहुँच गए ,यहाँ पर बहुत ही सुंदर लग रहा था। रामझूला गंगा नदी पर बना लोहे का एक पुल है जब इस पर कोई चलता है तब यह हिलने लगता है। हम लोग जब भी #ऋषिकेश आते हैं तो लगभग राम झूला पर जरूर आते हैं।
मैंने और शिवांग भाई ने कुछ देर गंगा किनारे बैठने की सोची ,, सामने माँ गंगा अखंड कीर्तन करती हुई बह रही थी। दिव्य नजारा था स्वर्ग की अनुभूति हो रही थी। कुछ समय बाद घूम-घामकर हम लोग वापस गुरद्वारा आ गए।
गुरुद्वारे का प्रसाद खाकर हम लोगों ने सोने की तैयारी शुरु कर दी। शिवांग ने पहले मोबाइल चार्ज किया फिर उसके बाद हम लोग सो गए।
सुबह उठकर तीन बजे नहाकर हम लोग ISBT बस स्टेशन पहुँचे ।1000 रु का 2 लोगों का गौरीकुंड का टिकट था तो जल्दी से ले लिया। जब बस देखी तो उसमें 80,90 यात्री थे तुरंत टिकट वापस कर दिया। सामने रुद्रप्रयाग की बस लगी थी जो बद्रीनाथ जा रही थी उसमें रुद्रप्रयाग तक चलना उचित समझा...बस में कुछ देर बाद बैठने के बाद पता चला कि इसमें #केदारनाथ की सवारी ज्यादा हैं तो यह केदारनाथ जाएगी यह भी हमारे ही वेरी गुड था, कुछ ही समय में बस ऋषिकेश से गौरीकुंड के लिये रवाना हो गई।
लगभग 8 बजे के आसपास बस एक स्थान पर रुकी तो हम लोगों ने चाय और मठरी का नाश्ता किया, शिवांग भाई मेरे लिये छोले की सब्जी ले आए और बोले कि सब्जी पूरी के साथ खा लो अभी पूरियां बची हैं जो घर से लाये थे। कुछ ही समय में हमने चाय पूरी और छोले की सब्जी निपटा दी। फिर हम दोनों लोग बस में आकर आराम से बैठ गए। बस चलने के कुछ ही समय बाद हम लोग सो गए। देवप्रयाग रुद्रप्रयाग कब आया गया कुछ पता न चला बस हम लोग सोते ही जा रहे थे। लगभग 12 बजे #गुप्तकाशी पहुंचे। बस रुकी तो शिवांग भाई बोले मुझे भूख लगी है टिक्की खायेंगे तो शिवांग भाई ने जब तक टिक्की खाई तब तक हमने चाय बनवा ली। फिर हम दोनों ने चाय और मठरी खाई। आपको बता दूं कि गुप्तकाशी के पहाड़ों में चाय पीने का अलग ही मजा है। आकाश में बादल छाए हुए थे हल्की हल्की बारिश हो रही थी।
30 मिनट ठहरने के बाद बस यहां से सोनप्रयाग के लिये चल दी....अब हम हिमालय के सबसे ऊपरी भाग में प्रवेश करने वाले थे। गुप्तकाशी से चलने के लगभग 10 मिनट बाद ठंडी हवाओं ने हमारा स्वागत किया किया ,पहाड़ों पर खूब बादल नजर आ रहे थे हम बादलों में घुमक्कड़ी कर रहे थे बहुत आनंद आ रहा था।
मानसून में जैसा सोच कर आए थे बिल्कुल वैसा ही नजर आ रहा था। खूब बारिश, बादल ,हरियाली, हरे भरे पहाड़, इस समय गढ़वाल में कुछ ज्यादा ही हरियाली थी सोच रहा था कतई मजा आ गया।
कुछ ही समय में हमें बस वाले ने सोनप्रयाग से एक किलोमीटर पहले ही सीतापुर कार पार्किंग पर उतार दिया। यहां भयंकर बारिश हो रही थी, गाड़ी में लगभग 20 सवारी थी। सबके कहने पर भी बस वाला गाड़ी लेकर #सोनप्रयाग तक न गया। वो कहने लगा गाड़ी यहीं तक आती है। मुझे पता था #सोनप्रयाग तक यहां से 1 किलोमीटर बारिश में पैदल चलना पड़ेगा। 20 मिनट गाड़ी में बैठने के बाद जब सभी सवारी उत्तर गई तो हम लोगों ने रेनकोट निकाल के पहन लिया और बाबा केदारनाथ जी का नाम लेकर बस से नीचे उतर आए।
बारिश बहुत तेज थी तो यहां पर रूकने की व्यवस्था देखी। कुछ होटल्स दिख रहे थे पर हम दोनों ने गौरीकुंड तक चलने का विचार बनाया।
भयंकर बारिश हो रही थी। हम लोग सीतापुर से पैदल ही #सोनप्रयाग के लिए चल दिये थोड़ी ही देर में जूतों में पानी भर गया। 1 km चलने के बाद हम सोनप्रयाग पहुँचे। पुल के पास गाड़ी मिली 50 रु लेकर उसने गौरीकुंड से 1 किलोमीटर पहले उतार दिया। बारिश हो रही थी 1 किलोमीटर फिर पैदल चलकर गौरीकुंड पहुँचे।
यहां पर एक शानदार होटल लिये और 1 घंटे विश्राम के बाद लगभग शाम के समय जब बारिश रुकी तो नाश्ता करने नीचे गौरीकुंड मार्केट में आए। पहले चाय पी...उसके बाद नीचे जाकर खूब फोटो और वीडियो बनाए।
यहां पर एक सबसे खास बात रही कि मंदाकिनी घाटी में हमको 2,3 हिरण जिसमें दो बड़े बड़े और एक छोटा सा बच्चा था दिख गया। जब तक फोटो की सोची तब तक वो पहाड़ों में गुम हो चुका था। हिरण देखने के बाद लगभग अंधेरा हो चुका था। हल्की- 2 बारिश की फुहार हो रही थी, पास के एक होटल में खाना खाकर हम लोग अपने रूम में आकर सो गए।
गौरीकुंड में खाना भी ठीक ठाक था रोटी, दाल , 2 सब्जी 150 रु में हम दोनों लोगों ने खाया था। उसके बाद रूम में आकर हम लोग कुछ देर मोबाइल चलाते रहे.....अब रात के 11 बज गए थे... अभी भी बारिश हो रही थी मौसम और भी ठंडा हो गया था अब हम लोगों ने विचार बनाया, कि सुबह जल्दी केदारनाथ का ट्रेक शुरु करना है तो सो जाते हैं फिर हम दोनों लोग सो गए।
सुबह 7 बजे उठे तो देखा बाहर बारिश हो रही है... मौसम ठंडा था बारिश रुकने का नाम ही न ले रही थी ....इस बीच फिर आँख लग गई अब मैं और शिवांग भाई सुबह 9 बजे दोबारा उठे,इस समय बारिश हल्की हो गई थी। तो जल्दी 2 उठकर नहाधोकर हम लोग ट्रेकिंग के लिये तैयार हो गए इस बीच घर से लाई हुई मठरी चाय का आनंद लिया......लगभग 10 बजे हम दोनो केदारनाथ ट्रेक के लिए रूम से निकले।
हमारे पास दो बैग थे हमने प्लान किया कि ट्रेक पर सिर्फ जरूरी सामान ही लेकर चलते हैं हमने दूसरा वाला बैग होटल रूम के नीचे लॉकर में रख दिया। बैग रखने के 50 रुपये लिये थे। उसके बाद अब हम लोगों ने गौरीकुंड में एक छोटी सी दुकान पर चाय नाश्ता किया फिर बाबा केदारनाथ की चढ़ाई शुरू कर दी बारिश हल्की 2 हो रही थी।
पैदल यात्रा पर श्रद्धालुओं का जोश बहुत था... यहां पर लोग बाबा केदारनाथ के जयकारे लगा रहे थे। धीरे 2 हम लोग ऊपर की ओर बढ़ रहे थे..…. केदारघाटी में बिल्कुल स्वर्ग जैसा लग रहा था। एक ओर ऊंचे- ऊंचे हरे- भरे पहाड़, तो दूसरी तरफ अखंड कीर्तन करती हुई मंदाकिनी नदी ,समय लगभग 10:30 सुबह बजे का था तो इस समय हल्की 2 ठंड थी। जब से गौरीकुंड से चले थे बारिश लगातार हो रही थी.... इस बार यात्रा पर बारिश लगातार मिल रही थी....मानसून में पहाड़ और भी हरे भरे थे हरियाली बहुत ज्यादा थी ...मानसून में बाबा केदार के दर्शन करने हम और शिवांग भाई जा रहे थे।
लगभग 11 बजे के आसपास हम दोनों जंगलचट्टी पहुँच चुके थे। यहां रुककर 15 मिनट आराम किया था , लगातार बारिश हो रही थी और खच्चर वाले ट्रेक पर जबरदस्त दौड़ रहे थे। रेन कोट हम दोनों ने पहन रखा था शिवांग भाई ने मेरे लिये स्पेशल रेन कोट ऋषिकेश से लिया था। बारिश कभी हल्की कभी तेज हो रही थी। आसमान में काले बादल छाए हुए थे। हम इस बार यही सोच कर आये थे कि ट्रेक पर बारिश में खूब झरनों में नहाने को मिलेगा।
मैं और शिवांग धीरे- धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहे थे लगभग 2 बजे के आसपास हम लोग रामबाड़ा पहुँच गए थे। राम बाड़ा तक पहुँचने में भूख लग आई थी। रामबाड़ा में एक दुकान पर आलू के पराठे और चाय के बारे में पता किया तो बोला खाना है तो खाओ वरना यहां से जाओ। हम लोगों ने उसी दुकान पर आलू के पराठे खाये 60 रु का एक पराठा दिया चाय 20 की बिल्कुल बेकार थी, पराठा तब भी ठीक था।
रामबाड़ा पहुँच कर पुल के पास कुछ देर रुककर हम लोग फिर आगे के लिये चल दिये। इस समय इस ट्रेक की सुंदरता स्वर्ग के जैसी थी।
आकाश में घने काले बादल छाए हुए थे रेन कोट पहने होने के बावजूद हम लोग पूरी तरह से भीग चुके थे। इस बीच ख़ुशख़बरी यह थी कि ज्यों ज्यों हम लोग ऊपर की ओर जा रहे थे बादल अब नीचे की ओर हो रहे थे। रामबाड़ा से 1 किलोमीटर और चलने के बाद बादल अब नीचे हो गए थे हम लोग अब बादलों से भी ऊपर थे। इतने सुहावने दृश्य, हरे भरे पहाड़, बादल बहुत सुंदर लग रहे थे।
इस बीच बारिश भी रुक गई थी जल्दी-जल्दी हम लोग भोले बाबा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। लगभग 6 बजे हम लोग बड़ी लिनचोली पहुँच गए थे।
यहां से मैंने शिवांग भाई से बैग ले लिया था,वह सुबह से लिये 2 थक गए थे। यहाँ से अब लगभग अंधेरा होने को था आकाश में बादल छाए थे, बारिश होने को थी जल्दी जल्दी हम लोग बाबा के धाम को पहुँचने वाले थे। लिनचोली के बाद लगभग 3,4 शार्ट कट लेकर हम लोग 8 बजे बाबा केदारनाथ के बेस कैम्प पहुँच गए।
बेस कैम्प पर ही एक टेंट वाले ने हमको 500 रु में एक टेंट दे दिया जिसमें हम लोग तुरन्त जाकर सो गए...सुबह 4 बजे उठकर अंधेरे ही बाबा केदारनाथ के दर्शन को चल दिये। बारिश हो रही थी रास्ते में 1 घंटे एक जगह रुक गए उसके बाद बाबा के धाम पहुचें।
कुछ ही समय बाद पूर्ण विधि विधान से मैंने और शिवांग ने बाबा केदारनाथ के दर्शन किये। इस बार बाबा के शिवलिंग को भी स्पर्श करने का सौभाग्य मिला।
दर्शन के बाद कुछ देर बाबा के धाम में फ़ोटोग्राफी की,बारिश अब भी हो रही थी, आप सबके कल्याण के लिए बाबा केदारनाथ से प्रार्थना की, अद्भुत नजारा था। धाम में द्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा था।
कुछ देर और धाम में रुककर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर हम लोगों ने वापस गौरीकुंड के लिये उतरना शुरू कर दिया। रास्ते में उतरते समय हम लोगों ने कई जगह फोटोग्राफी भी की।
इस समय यहां का नजारा स्वर्ग से भी सुंदर लग रहा था। हवा जो लग रही थी सच मे ऐसा लग रहा स्वर्ग से आती होगी। हमने और शिवांग भाई ने रास्ते में खूब फ़ोटो वीडियो क्लिक की,रास्ते में जगह-जगह ट्रेक पर सुंदर-सुंदर फूल लगे थे।
वाकई यह सबसे सुंदर ट्रेक था। हम लोग 12 बजे रामबाड़ा पहुँच गए यहाँ पर कुछ देर रूकने के बाद फिर चलना शुरू किया। लगभग 4 बजे गौरीकुंड पहुँचे। गौरीकुंड में अब भी बारिश हो रही थी उसके बाद टैक्सी में बैठकर हम लोग सोनप्रयाग पहुँच गए। फिर सोनप्रयाग से टैक्सी लेकर गुप्तकाशी पहुँच गए।
गुप्तकाशी पहुँचने में रात हो गई थी हम लोगों ने यहीं एक रूम 500 रु में ले लिया। रूम में पहुँचकर आराम से नहाकर हम लोग खाना खाने निकले,रूम के बाहर ही गुप्तकाशी में एक चौहान साहब का होटल था। शिवांग भाई बोले हम खाना यही खायेंगे फिर हम दोनों ने खाना खाया। वाकई चौहान साहब का खाना बहुत स्वादिष्ट और लजीज था।
खाना खाने के बाद हम गुप्तकाशी घूमने निकले ,चाय के होटल पर बैठकर चाय पी तो हमारी तहसील पुवायां शाहजहाँपुर से एक साथी अधिवक्ता अभिनव वर्मा जी का फ़ोन आ गया केदारनाथ यात्रा के बारे में काफी बात हुई। अभिनव भाई ने शिवांग भाई से भी कुछ देर बात की, हम चाय पीते रहे ।गुप्तकाशी में भी इस समय काफी ठंड लग रही थी। चाय पीकर हम लोग बाहर आए और कुछ देर यहां गुप्तकाशी में रात 10 बजे घूमने के बाद अपने रूम पर जाकर सो गए।
गुप्तकाशी में सुबह 7 बजे उठकर बस से 12 बजे तक ऋषिकेश आ गया। यहाँ पहुँचकर भयंकर गर्मी ने हमारा स्वागत किया।
परमार्थ निकेतन के सामने गंगा जी में लगभग 1 घंटे मैंने और शिवांग भाई ने स्नान किया। स्नान के बाद कुछ देर ऋषिकेश बाजार भी घूमे। गंगाजल जल घर लाने के लिए बोतलों में भर लिया।
लगभग 2 घंटे मंदिर तमाम आश्रम गंगा घाट पर घूमने के बाद हम रात 8 बजे की ट्रेन से वापस शाहजहाँपुर आ गए। इस प्रकार शिवांग भाई के साथ हमारी दूसरी केदारनाथ यात्रा 2022 का समापन हुआ।
जय श्री केदारनाथ
जवाब देंहटाएंजय बाबा केदार, अदभुत यात्रा ब्लॉग सूरज जी भाई। आपके लेखन में जादू है। ईश्वर की कृपा बनी रहे ।! आप ऐसे ही तीर्थाटन करते रहें और लिखते रहें, हम सबका यात्रा मार्गदर्शन करते रहें।
जवाब देंहटाएंअति सुंदर इसे पढ़कर बहुत ही अच्छी जानकारी मिली ।धन्यबाद आपका
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