भारत परिक्रमा 2022

                          (तिरुपति मंदिर ) 
20/4/2022 को हम सपरिवार श्री तिरुपति बाला जी महाराज के दर्शन के लिये निकले...हमारा  कचहरी में कुछ वर्क था तो मैं आज कचहरी भी गया। ठीक 11:00 बजे मै बरेली जक्शन पहुँच गया।

हमारा परिवार वहां पर पहले ही उपस्थित ¹था... ¹¹ इंदौर एक्सप्रेस प्लेटफार्म न 4 पर लगी थी...श्री तिरुपति बाला जी महाराज का नाम लेकर हम सभी लोग ट्रेन में सामान रख कर बैठ गए।

बरेली से निकलते ही माता जी द्वारा घर से आया खाना पनीर ,आलू ,बेसन की रोटी  और सलाद का हमने भोजन किया।
लगभग 3 घंटे बाद हमारी गाड़ी अलीगढ़ 5पहुँच गई...इस ट्रेन से हम सभी को आगरा तक nजाना था ,आगरा से हम सभी का  तिरुपति तक का कंफर्म टिकट था। 6:30 पर आगरा पहुँच गए ,पवन मामा हम सभी लोगों से मिलने आगरा कैंट आए। पवन मामा ने यात्रा संबधी ⁸ए ⁹बहुत सारे सुझाव दिए। 
 9;30 पर मामा ने विदा ली।
यहां (आगरा) से 10;20 रात्रि में केरला एक्सप्रेस से  हमको तिरुपति बाला महाराज के दर्शन के लिये निकलना है। कुछ  समय में केरला एक्सप्रेस आ गई और हम सभी लोग आराम से ट्रेन में सामान रख कर बैठ गए,कुछ ही समय में ट्रेन तिरुपति बाला जी के लिए चल दी।
केरला एक्सप्रेस ट्रेन #आगरा कैंट स्टेशन पर  रात 10 :30 बजे आई ,कुछ ही समय में सारा सामान रखकर हम सभी लोग ट्रेन में बैठ गए...

11:30 पर हम सभी ने  धौलपुर के पास ट्रेन में खाना खाया  सब्जी आगरा कैंट के बाहर होटल से पैक कराई थी सब्जी पनीर छोले ,और चिली पनीर की थी, जो कि बहुत स्वादिष्ट और लजीज थी परिवार के साथ ट्रेन में डिनर करने का अपना अलग आनंद होता है। डिनर करके अपनी सीट पर जाकर मैं  सो गया। सुबह उठा तो ट्रेन इटारसी में थी। फ्रेश होकर  एक चाय  पी,और कुछ देर बाद  फिर सो गया, ट्रेन लगभग 12:00 बजे नागपुर पहुँची...नागपुर में परिवार के साथ संतरे खाए जो कि बहुत स्वादिष्ट थे। 

कुल मिलाकर अभी तक  की यात्रा बहुत शानदार और यादगार रही है ,अभी तिरुपति का बहुत लंबा सफर है। बहुत दिन बादः मैं यात्रा पर निकला हूँ।

अभी मेरी ट्रेन विजयवाड़ा पहुँचने वाली है। डिनर मैंने कर लिया है। 100 की थाली ट्रेन में ही ली है।
अभी सफर बहुत लंबा है।



21/4/22 को रात 10:30 बजे मेरी ट्रेन केरला एक्सप्रेस #विजयवाड़ा पहुँची ,विजयवाड़ा में रात को अंगूर खाए, जो बहुत मीठे और स्वादिष्ट लगे....

रात में विजय वाड़ा शहर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसा रात में मंसूरी से देहरादून दिखता है.... ठंडी 2 हवा चल रही थी अब मुझे हल्की 2 नींद आने लगी कुछ समय बाद मैं सो गया फिर जब मैं उठा तो ट्रेन #नेल्लोर पहुँच गई थी 3 बज रहा था फिर न सोने का मन बनाया.....औरअपना सामान पैक करने की योजना बनाई.... ट्रेन अपने निर्धारित समय पर तिरुपति 5 बजे पहुँच गई।

तिरुपति स्टेशन से बाहर निकलकर एक टैक्सी वाले ने 1600 रु तिरुमाला पहुँचने के बताए...अंत में 1000 रु में मान गया था वह पीछे ही पड़ गया पर मुझे उसकी टैक्सी से  जाना ही नहीं था। 2 साल पहले #तिरुपति आया था तो याद था कि स्टेशन के सामने से ही तिरुमाला के लिये बस मिल जाती है।

स्टेशन के बाहर बता किया तो तिरुमाला के लिये बस लगी हुई थी। तिरुपति से तिरुमाला बस का किराया 75 बताया। मैंने तुरंत 7 टिकट कराए मित्रों हम सपरिवार 7 लोगों के साथ यात्रा पर हैं। 
तिरुपति  से निकलते ही एक जगह चेक पॉइंट पर बस वाले ने सारे बैग उतार कर चेक करवाने को कहा ऐसा सुरक्षा की दृष्टि से होता है।
लगभग 40 मिनट बाद #तिरुपति पहुँचे तुरंत CRO office पहुँच कर रूम के लिये रजिस्ट्रेशन किया। CRO office तिरुमाला बस स्टैंड के बिल्कुल पास है।

ऑफिस पर मौजूद भाई ने बताया कि 3 घण्टे बादः आपके Number पर msg आएगा ,तब आपके  Room की Confirm booking हो जाएगी 10 बजे MSG आया सुदर्शन कॉम्प्लेक्स में रूम मिल गया है 100 Rs का रूम है पर 600 डिपॉजिट किये हैं बताया कि 500 वापस हो जाएंगे।
तिरुपति बाला जी में रूम साफ स्वच्छ हवादार बहुत ही सुंदर है, अब दिन के 1:30 बजे हैं हम अपने केशदान के लिए मंदिर की ओर जा रहे हैं। 

साथियों आंध्रप्रदेश में हिंदी समझने वाले बहुत कम ही लोग मिल रहे हैं लैंग्वेज की दिक्कत हो रही है। मेरी English गुड नहीं है।
                     
           
           (मंदिर प्रांगण में स्थापित तिरुपति प्रतिमा)

22/4/22 को हम सभी लोग  शाम 3 बजे अपने रूम से  निकलकर श्री तिरूपति बालाजी  महाराज के दर्शन के लिये निकले...

 मुझे केशदान करना था तो मैं #कल्याणकट्टा नामक स्थान पर पहुँच गया ,जो कि सुदर्शन कॉम्प्लेक्स के बहुत पास था.कल्याण कट्टा पर पहुँच कर हमने भगवान श्री तिरुपति बाला जी में अपने केश दान किये। यहाँ केशदान का बहुत अधिक महत्व है ,केश अर्पित के साथ 2 मान्यता है कि  हम अपना दंभ, घमंड और सारी बुराई यहाँ छोड़ देते हैं ऐसा करने वाले पर  भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है। 

केशदान के बाद हम स्नान कर सपरिवार शाम 4 बजे  सर्वदर्शनम वाली लाइन में तिरुपति बाला जी महाराज  के दर्शन के लिये लग गए...

सर्वदर्शनम  का अर्थ है सभी के दर्शन जो फ्री दर्शन करते हैं वो श्रदालु सर्वदर्शनम वाली लाइन में लगते हैं।  जो लोग 300 रु का दर्शन टिकट लेते हैं वह इस लाइन में नहीं लगते हैं। उनके लिए दूसरी लाइन होती हैं,मेरा दर्शन टिकट हो ही नहीं पाया था।
                           (तिरुपति धाम)
शुरू में मंदिर की लाइन में लगे तो बिल्कुल भी भीड़भाड़ नहीं था हम सभी गोविंदागोविंदा कहकर चलते रहे। 5 बजे के बाद हम सभी को एक हाल में रोक दिया गया और वहां पर सांभर और चावल से बना प्रसाद खाने को दिया गया,जो बहुत स्वादिष्ट था। लगभग 2 घंटे हाल में बैठने के बाद लाइन चल दी,उसके बाद 9 बजे हम सभी लोगों को एक  हाल  में फिर रोक दिया। लगभग 3 घंटे  हाल में बैठने सोने और लेटने के बाद  रात 12 बजे  लाइन फिर चल दी। 

मुझे ऐसा लग रहा था कि दर्शन जल्दी हो जाएंगे क्यों कि इस बार मुझे 2018 की तरह भीड़भाड़ नहीं लग रहा था। यहां पर शायद  Covid 19 के कारण ही भीड़ कम हो पर यहां Covid का कोई भी असर दिख तो नहीं रहा था।
सब कुछ भूलभुलैया सा लग रहा था लाइन में लगे लगे कुछ समझ नहीं आ रहा था मंदिर में बाला जी का प्रसाद चावल और सांभर लगातार मिल रहा था।

हम लोग धीरे 2 लाइन में आगे बढ़ रहे थे समय रात के 12:30 हो गया था इस बीच मुझे मंदिर का शिखर दिख गया तो मैं समझ गया 30 मिनट में दर्शन हो जाएंगे। श्री #तिरुपति बाला जी महाराज की कृपा से ऐसा ही हुआ। 

23/4/22 को  हम सभी लोगों ने तिरुपति बाला जी महाराज के दर्शन सपरिवार किये। आज श्री तिरुपति बाला जी महाराज  के सपरिवार दर्शन कर मेरा जीवन सफल हुआ।

दर्शन के बाद श्री बाला जी का लड्डू मिलता हैं जिसके स्वाद का वर्णन करने में मैं असमर्थ हूँ,शायद ही ऐसा टेस्ट कहीं रहा हो।
                         ( तिरुपति मंदिर)
श्री बाला जी महाराज वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन कर हम लोग रात 1:30 मन्दिर  प्रांगण में आ गए ,मौसम बहुत अच्छा था,खूब ठंडी 2 हवा चल रही ठंड लग रही थी। अब भूख लग रही थी तो एक मसाला डोसा 60 रु, पराठा 50रु  और चाय10रु खा पीकर  हम सभी सुदर्शन कॉम्प्लेक्स में आकर अपने रूम पर आकर सो गए। 
 

23 /4/22  को हम सपरिवार तिरुमाला में अपने रूम से सज धज कर तिरुपति बालाजी  मंदिर के आसपास  घूमने के लिए निकले....
                              (सुदर्शन चौक )
समय दिन के 11 हो गया था,कई जगह सांभर और चावल का प्रसाद मिल रहा था...हम लोगों का विचार मंदिर के आसपास घूमने का था। हम सभी लोग धीरे 2 मन्दिर प्रांगण की तरफ बढ़ रहे थे...दिन के 12 बज गए थे...गर्मी बहुत बढ़ गई थी भूख लग रही थी। हम सभी लोग कुछ देर मन्दिर प्रांगण में रुके...।
                           ( तिरुपति प्रांगण )
कुर्ता पजामा पहनकर मैंने पहली बार फ़ोटो एक कैमरामैन से खिंचवाए उसने 300 रु लिए फोटो बढ़िया क्लिक नहीं किये। 
अब भूख लगने लगी थी,1बज गया था...
                      सूरज शर्मा 
                            माँ संग बाबू
हमने अन्नप्रसादम पर पहुँच कर श्री तिरुपति बाला जी महाराज का प्रसाद ग्रहण किया, प्रसाद बहुत स्वादिष्ट था मैंने ऐसा प्रसाद शायद ही कहीं खाया हो। आपको जीवन में एक बार तिरुपति जी का प्रसाद ग्रहण करना ही चाहिए।
             तिरुपति मन्दिर में अन्नप्रसाद ग्रहण करती माँ
हम सभी लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर रूम पर चलने का विचार बनाया..3 बजे रूम पर पहुँच कर आराम से सो गया.. 5:30 पर उठकर मैं पुनः मंदिर की ओर चल दिया ,तिरुपति बालाजी मन्दिर पहुँचकर मैंने शाम को  Advocate  Suraj sharma वाले पेज से 35 min की लाइव वीडियो बनाई..इस दौरान मंदिर में कोई विशेष अनुष्ठान चल रहा था। 2 हाथी आगे-आगे चल रहे थे, पीछे2  भगवान विष्णु की पालकी चल रही थी।
भगवान विष्णु साक्षात तिरुपति भ्रमण पर हैं ऐसा प्रतीत हो रहा था..हजारों की भीड़ थी पूरा मन्दिर प्रांगण श्रद्धालु लोगों से भरा था। सब लोग गोविंदा गोविंदा की जय जयकार कर रहे थे। 
                      माँ संग बाबू
मैंने तिरुपति बाला जी महाराज के  Live  दर्शन अपने उन दोस्तों ,मित्रों रिश्तेदारों  को video call के माध्यम से कराए,,जिन्होंने मेरी call उठा ली। 
दोस्तों अब समय 8 बजे का था मंदिर में ठंड लगने लगी थी मैंने अपनी मम्मी को call कर मन्दिर प्रांगण में बुलाया।
मम्मी सभी लोगों को लेकर आ गईं। कुछ समय मंदिर प्रांगण में फ़ोटो वीडियो बनाने के बाद श्री बाला जी महाराज से विदा ली। फिर थोड़ी दूर चलने के बाद  एक होटल पर बैठकर हम सभी ने चाय पी 12 रु , लच्छा पराठा 50 रु मसाला डोसा 60 रु  खाया। अब थकान बहुत हो चुकी थी मन आराम करने का था ,समय रात के 10 हो रहा था गोविंदा गोविंदा  कहते हुए हम लोग सुदर्शन काम्प्लेक्स स्थित अपने रूम पर पहुँच कर सो गए। मित्रों इस तरह हमारी श्री तिरुपति बाला जी महाराज की यात्रा  2022 में समाप्त हुई।



               
                 जय श्री तिरुपति बाला जी की








23 /4/22 को हम सभी लोगों ने अपने रूम पर आपस में बात कर सुबह जल्दी Vellore घूमने का प्लान का प्लान बनाया..

मित्रों हमारा रिजर्वेशन  25/4/22 को ट्रेन 16779 में तिरुपति से रामेश्वरम तक का था.....यह खुश खबरी थी कि RAC अब confirm सीट हो चुकी थी। 

सुबह 8 बजे हम सभी लोग  सुदर्शन कॉम्प्लेक्स वाले रूम से निकल  बाहर आएं.....हम दो दिन #तिरुपति रुके तो रूम का किराया 200 हुआ ....100 रुपये देकर अपने डिपॉजिट किये पैसे लेकर हम सभी लोग तिरुमाला बस स्टैंड आ गए। 


Vellore के लिए बस बस स्टैंड लगी हुई थी, हम सभी लोग बस में बैठ गए कुछ ही समय में बस Vellore के लिए चल दी। 

तिरुमाला से वेल्लोर तक का किराया 200 रु था। 
3 घंटे बाद बस वेल्लोर पहुँची। एक ऑटों वाले ने  लक्ष्मी जी गोल्डन टेम्पल तक पहुँचाया...!
300 रुपये लिए ,1 घंटे रूम देखने के बाद 500 का रूम मिला। अब समय 24/4/22 दिन के 12 बजे हो गया था। 

गर्मी बहुत थी,मैंने रूम से निकलकर 2 गिलास ऑरेंज जूस पिया,बापस आकर शाम को लक्ष्मी जी के स्वर्ण मंदिर के दर्शन करने का प्लान बनाया।

शाम को  स्नान कर सबसे पहले होटल  से लगे मंदिर के दर्शन किये,,मंदिर की भव्यता और दिव्यता देख कर हमारी आँखें चिमधियाँ गईं। दर्शन के बाद नारायणी होटल पर जाकर सांभर इडली 30 रू एक चाय 10 rs का नाश्ता किया शाम का नाश्ता कर मैं दोबारा अपने रूम पर आ गया। 
GoldenTemple #Vellore

''मंदिर जिसे देखकर दिमाग नहीं आँखें 
सोचती हैं।"

                    लक्ष्मी जी का स्वर्ण मंदिर 
24/4/22 शाम को सांभर इडली खाकर Vellore में अपने रूम पर  पहुँचा तो मम्मी सहित सभी लोग तैयार थे फिर  माता लक्ष्मी के स्वर्ण मन्दिर के लिये निकले,शाम हो गई थी। 

हमारे देश में माता लक्ष्मी के कई मंदिर हैं पर हम जिसके बारे में बता रहे हैं यह  दक्षिण भारत में माता लक्ष्मी का   स्वर्ण मन्दिर हैं। 
 हम अपने परिवार के साथ तमिलनाडू राज्य के #Vellore नगर में मलाइकोडी के पहाड़ों पर 1700 kG सोने से बने माता लक्ष्मी  के गोल्डन टेम्पल के दर्शन के लिए जा रहे थे,शाम के 7 बजे गए थे।
कुछ ही समय में हम सभी लक्ष्मी जी के मंदिर पहुँच गए...1 घटें एक हाल में बैठने के बाद लाइन चल दी,हम सभी लोग दर्शन के लिए धीरे धीरे चलने लगे... मन्दिर बहुत ही दिव्य लग रहा था     शाम के समय मंदिर बहुत ही सुंदर लग रहा था।...मंदिर की दिव्यता और भव्यता के लिये मेरे पास ज्यादा शब्द नहीं हैं। 2,3 किलोमीटर घूमने के  बादः हम मंदिर के निकट पहुँचे, सपरिवार माता लक्ष्मी का आशीर्वाद  प्राप्त किया।  मंदिर के पास बहुत  ज्यादा भव्यता ओर दिव्यता थी ...रात में  मन्दिर बहुत ही भव्य लग रहा था।
यह मंदिर 100 एकड़ के क्षेत्र में फैला है।  रोजाना लाखों लोग यहां दर्शन करते हैं। इस मंन्दिर में की गई नक्काशी और कलाकृतियों को देखकर हम सभी अचंभित हैं।
                                      माँ 
माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर हम मंदिर के बाहर आए ,ऑरेंज जूस 50 रु पिया। कुछ ही समय में नारायणी पीठ (होटल) में जाकर मटर पनीर ,दाल फ्राई रोटी का डिनर किया,
डिनर का बिल 525 रु बना जिसमें हम सभी लोगों ने डिनर कर लिया।
डिनर के बाद हम सभी रूम पर जाकर सो गए,इस तरह हमारी velllore यात्रा का समापन हुआ।  


25/4/22 को सुबह 8 बजे अपने रूम पर सोकर उठे... नहा धोकर माता लक्ष्मी के दर्शन किये...

दर्शन के बाद रामेश्वरम के लिये तैयारी शुरू कर दी...
रामेश्वरम के लिए हमारी ट्रेन 16779 2:45 पर थी। 

11 बजे  हम सभी ने Vellore वाले होटल से चेक आउट कर दियाउसके बाद एक  ऑटो वाले से स्टेशन तक छोड़ने की बात की,उसने 220 में Vellore कैण्ट ड्रॉप कर दिया। 

वेल्लोर कैंट पर चंदा ने जोमैटो से ऑनलाइन 1 वेज विरयानी 140रु मंगवाई। उसका टेस्ट बहुत अच्छा था  फिर 3 और वेज  बिरयानी मंगवाई  और मोमोज मंगवाए,ट्रेन आने के बाद जोमैटो वाला आर्डर लेके आया,ट्रेन  में बैठकर हम सभी ने मोमोज और वेज बिरयानी का आनंद लिया।
 2,3 घण्टे बाद ट्रेन विल्लुपुरम पहुँच गई, समय शाम के 7 बज गए थे। लगभग 9 बजे मैं अपनी सीट जाकर पर सो गया  उसके बाद  सुबह 4 बजे जब ट्रेन पम्बन ब्रिज पहुँची तब हमारी आँख खुली सबको बताया कि रामेश्वरम आ गया है।
सभी परिवार के लोगों को धीरे 2 उठाया ,कुछ समय बाद ट्रेन 26/4/22 को सुबह 5 बजे अपने निर्धारित समय पर श्री रामेश्वरम पहुँच गई। एक घंटे आराम से सुबह 2 घूमने के बाद 600 रू का रूम लिया। 

होटल पर सामान रखकर हम रामेश्वरम  में घूमने निकले।
 11 बजे रूम पर वापस आकर सभी परिवार के लोगों को साथ लेकर अग्नितीर्थंम पहुँचे। रामेश्वरम में मुख्य मंदिर में दर्शन से पूर्व अग्नितीर्थंम में स्नान की धार्मिक मान्यता है। सबसे पहले मैंने अग्नितीर्थम समुद्र में स्नान किया।
.                                माँ
                             चंदा और माँ
                              हम और बाबू 
बाद में अग्नि तीर्थंम में माँ ,अमित चन्दा और हमारे बेटे ने खूब स्नान किया। उसके बाद भीगे कपड़ों में ही हम सभी लोग श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग मंदिर के 22 पवित्र तीर्थ स्नान के बाद कपड़े बदलकर श्री राम नाथ स्वामी रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग मंदिर दर्शन के लिए निकले।
आज मैं श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग मंन्दिर के दर्शन दूसरी बार करने जा रहा था। मंदिर के अंदर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं था। 
कुछ ही समय में ज्योतिर्लिंग मंदिर के  दर्शन हो गए।

सियावर रामचंद्र की जय।

रामेश्वरममंदिर


     
"आज भी हमारे देश में ऐसे मंदिर हैं  जिनके रहस्य आज तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं।" 
                    
                              माँ बाबू और हम 
                            


भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक,भारत देश के सबसे अलंकृत मंदिरों में एक , जगतगुरु श्री शंकराचार्य जी द्वारा परिभाषित ,4 धामों में एक श्री रामेश्वरम जैसे महातीर्थ  के सपरिवार दर्शन  कर हम सभी लोग मंदिर से बाहर निकले।  दोपहर के  12 गए थे, मंन्दिर के अंदर पत्थरों पर की गई नक्काशी बहुत प्यारी और शानदार लग रही थी।
                   
                               चंदा और बाबू
दर्शन के बाद बहुत तेज भूख लगी तो  मंदिर के सामने एक होटल पर माँ के साथ  बैठकर दक्षिण भारत व्यंजनों  साउथ इंडियन थाली 100 रु का स्वाद लिया। खाना बहुत ही स्वादिष्ट था।
उसके बाद रूम पर पहुँचकर सो गए..शाम को पंचमुखी हनुमान मंदिर गए मंदिर बंद था ,दर्शन नहीं हुए शाम को अग्नितीर्थम पर थोड़ा बहुत घूमकर डिनर करके वापस होटल पर आ गए। आसपास मन्दिर के इधर उधर बाजार घूमकर डिनर में पनीर ,दाल फ्राई तंदूरी रोटी सलाद और चावल लिए थे हम 4 लोग थे बिल 590 रू का बना था, पंजाबी होटल पर खाना खाया था।
खाना खाकर हम सभी लोग अपने होटल पर पहुचे।
रात को होटल में  दीमक के कीड़े बेड पर घूमने निकले इसलिए रूम बदलना पड़ा,जबकि दिन में वो होटल बहुत बढ़िया साफ स्वच्छ लग रहा था। उसके सामने ही 1000 में AC रुम मिल गया। तो रूम चेंज कर दिया।

27/4/22 को सुबह 9 बजे उठ गए एक ऑटों वाले से धनुषकोडी चलने के लिए बात की तो 800 में तैयार हो गया। हम सभी लोग तुरंत ऑटों में बैठकर धनुषकोडी और रामसेतु पॉइंट देखने निकले हम सभी लोगों ने रामसेतु पॉइंट पर 10 मिन स्नान के बाद भीगे कपड़ों में ही ऑटों में आकर बैठ गए। कुछ देर वहां पर फ़ोटो वीडियो बनाई कुल मिलाकर बहुत बढ़िया लगा ,हमारे सभी कपड़ों में रेत लग गई थी तो धनुषकोडी में एक कुएं के पानी से नहाएं,कुएं के पानी से नहाने की फीलिंग गुड थी। 


उसके बाद ऑटों वाला हमको विभीषण मंदिर ले गया, विभीषण मंदिर से श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग  मंदिर के शिखर दर्शन हो रहे थे।
                            अमित 
विभीषण मंदिर के बाहर नारियल पानी पिया और अपने बेटे को पिलाया,विभीषण मंदिर देखा समयदोपहर 2 का था वापस आकर हम रूम पर सो गए।

नेत्र सजल हैं आत्मा तृप्त हो गई, मैं धन्य हो गया इस धाम के दर्शन कर।

27/4/22 को शाम 5  बजे उठकर रामेश्वरम मंदिर के आसपास फोटोग्राफी करके हम वापस रूम पर आ गए...

अमित को मंदिर की भव्यता और दिव्यता के बारे में बताया, फिर मम्मी के साथ रात 8 बजे श्री रामेश्वरमज्योतिर्लिंग मंन्दिर के दर्शन किए। दर्शन करने के बाद जब मंदिर के बाहर आए तो  मौसम बहुत सुहावना हो गया था। ठंडी- 2 हवा चल रही थी ,तो  मम्मी ने मंन्दिर के आसपास प्रसाद का सामान लिया।
प्रसाद लेकर हम लोग  पंजाबी ढाबा पर डिनर करने पहुँचे, पंजाबी ढाबा पर हमने पनीर, दाल फ्राई और तंदूरी रोटी चावल का डिनर किया।  बिल बना 320 का... नार्थ इंडियन फ़ूड यहां मिल  गया था। खाना बहुत स्वादिष्ट और लजीज था,खाना खाकर हम लोग रूम पर आकर सो गए  सुबह 4 बजे उठकर रूम चेक आउट कर दिया।

रामेश्वरम से मदुरई के लिए एक्सप्रेस ट्रेन सुबह 5:40 पर थी। कुछ ही देर में हम सभी लोग  रामेश्वरम रेलवे स्टेशन पहुँच गए।  ट्रेन प्लेटफार्म पर लगी थी, हम सभी लोग टिकट लेकर बैठ गए मदुरई तक 70 रु प्रति व्यक्ति एक्सप्रेस का टिकट था।

5;40 पर ट्रेन  श्री रामेश्वरम  स्टेशन से चल दी,कुछ ही समय में पम्बन ब्रिज आ गया, हमने ट्रेन में बैठकर ,लटककर खूब फोटोग्राफी की.... बहुत बढ़िया नजारा लग रहा था। ट्रेन समुद्र के ऊपर चल रही थी, हम दूसरी बार पम्बन ब्रिज देख रहे थे।
 
कुछ घण्टों बाद ट्रेन ने 28/4/22 को  9:15 AM पर मदुरई पहुँचा दिया... मदुरई रेलवे स्टेशन पर फ्रेश होकर हम सभी लोग मीनाक्षी अम्मान मंदिर में ऑटो से दर्शन के लिए पहुँचे। सामान क्लॉक रूम में स्टेशन पर ही रख दिया था,ऑटो वाले ने मंन्दिर तक पहुँचाने के 80 रुपये लिये।

                     ( मीनाक्षी अम्मान मन्दिर )
मीनाक्षीअम्मानमंदिर के दर्शन करने में 1 घंटा लग गया..यह मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और भव्य मंदिरों में से एक है, इसका ऊँचा गोपुरम सैलानियों को आकर्षित करता है।  मीनाक्षी  अम्मान मंन्दिर के दर्शन कर 2: 40 पर हम सभी लोग मदुरई रेलवे स्टेशन आ गए। मंदिर में सिर्फ मैंने प्रसाद भी ग्रहण किया था बहुत ही स्वादिष्ट खाना था।

2:40 पर Nagercoil के लिए ट्रेन थी। हम सभी लोग  ट्रेन में बैठ गए डिब्बा लगभग पूरा खाली था। 2,4 यात्री ही थे। ट्रेन में शाम को 8 बजे के बाद ठंड लगने लगने लगी। आसमान में बादल छा गए ,बहुत ठंडी- 2 हवा चलने लगी मौसम बहुत अच्छा हो गया था। 

8:30 पर हम सभी लोग Nagercoil पहुँचे। एक ऑटो वाले ने 350 रु  लेकर  रात 10 बजे हम सभी को कन्याकुमारी पहुँचा दिया, कन्याकुमारी में 1000 रू का  रूम लेकर हम डिनर करने निकले..  कन्याकुमारी में  हमने  मिक्स वेज, दाल फ्राई, फ्राई राइस  तंदूरी रोटी का डिनर किया, यहाँ का खाना मुझे बहुत ही स्वादिष्ट लगा था,डिनर करके हम सभी लोग रूम पर पहुँचे, सुबह उगते  हुए सूरज को देखने का प्लान बना कर हम लोग सो गए।

कन्याकुमारी में सुबह 4 बजे हम सभी उठ गए...30 मिनट में रेडी होकर  #सनराइज देखने के लिये सनराइज पॉइंट की तरफ चल दिये,कुछ ही मिनट में सनराइज पॉइंट पर पहुँच गए.....सनराइज होने ही वाला था... अभी अंधेरा ही था, फिर भी विवेकानंद शिला पर लहरें टकराती हुई दिख रही थीं।
कन्याकुमारी में मुख्य आकर्षण सनराइज, सनसेट और विवेकानंद स्मारक है... कन्याकुमारी हिंदमहासागर ,अरबसागर और बंगाल की खाड़ी का संगम स्थल है.. तीनों सागर अलग अलग रंगों से यहाँ जो मनोहरी छटा बिखेरते हैं, वो देखते ही बनती है ,और समुद्र से आती लहरें #कन्याकुमारी की सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। 
लगभग सनराइज से कुछ पहले हम  त्रिवेणी संगम पहुँच गए... यहाँ से उगते हुए सूरज को देखने के लिये  हजारों सैलानी पहले से ही मौजूद थे, खूब भीड़भाड़ था। कुछ देर हमने  समुद्र किनारे बैठकर फोटोशूट किये। और हम समुद्र से आती जाती टकराती लहरों को देखते रहे ,कुछ ही समय में सूर्य का उदय हो गया,बहुत ही दिव्य नजारा था,बहुत लोग हाथ जोड़ कर उगते हुए सूर्य के सामने  प्रार्थना कर रहे थे,सूर्य उदय के कुछ समय बाद ही भीड़ छटने लगी थी। 

लगभग 30 मिनट तक यह दिव्य नजारा देखने के बाद  हमने समुद्र स्नान का विचार बनाया। कुछ ही देर में हम संगम पर पहुँच गए जहां तीन सागरों का मिलन हो रहा था। कुछ ही समय में कपड़े उतार कर समुद्र में कूद गए। 30 मिनट तक स्नान करके थक गए, तो कपड़े पहनने का विचार बनाया और फिर  कपड़ें पहन कर कन्याकुमारी माता के मंदिर के  दर्शन किये।

दर्शन करने में 11 बज गए थे। उसके कुछ समय बाद अपने होटल के पास से आलू के पराठे और सब्जी खाकर वापस रूम पर आ गए।
 विवेकानंद रॉक मेमोरियल तक मैं पहले जा चुका था तो आज मुझे जाना ही नहीं था। इसलिये रूम पर ही सोने का विचार बनाया और सो भी गया। 

लगभग 5 बजे शाम को नींद खुली स्नान करके फिर घूमने निकले। इस समय मौसम थोड़ा ठंडा हो गया था, 30 मिनट घूमने के बाद कन्याकुमारी माता के मंदिर के पास चाय पी और फिर त्रिवेणी संगम पर  सनसेट का नजारा देखने पहुँच गए। 
 
समय 6 के आसपास था सनसेट होने ही वाला था त्रिवेणी संगम पे हजारों सैलानियों की भीड़ थी इस समय बहुत ठंडी 2 और तेज हवा समुद्र से आ रही थी, हम इस  त्रिवेणी संगम पर सूर्यास्त का भव्य और दिव्य नजारा देख रहे थे।
विवेकानंद शिला बहुत ही सुंदर लग रही थी  साथ में तमिल कवि का स्टेचू भी सुंदर लग रहा था। 

हम त्रिवेणी संगम पर फ्रूट चाट खाते हुए घूम रहे थे। त्रिवेणी संगम पर एक खूबसूरत मार्केट दिख  रही थी। बहुत सारे लोग कुछ न कुछ खरीद रहे थे। मुझे कुछ खरीद कर बैग का वजन नहीं बढ़ाना था, इसलिए कुछ भी न खरीद कर मार्केट घूमने का विचार बनाया।
मौसम बहुत सुहाना हो गया था,रात के 8 बज गए थे। कुछ ही समय में परिवार के सभी लोग संगम पर आ गए। कुछ देर और घूमने के बाद हम सभी अपने होटल पर आ गए। अपने होटल से लगे रेस्टोरेंट में मिक्सवेज और तंदूरी रोटी का डिनर किया।
अब हम सभी को त्रिवेंद्रम के लिये निकलना था हम लोगों ने त्रिवेंद्रम बस से चलने का विचार बनाया क्योंकि ट्रेन नहीं थी।कुछ ही समय में बस स्टेशन पर पहुँच गए। ऑटों वाले ने बस स्टेशन तक पहुँचाने के 100 रु लिए, बस स्टेशन पर #त्रिवेंद्रम के लिये आखिरी बस लगी थी समय रात के 10 बज रहा था। कुछ ही समय में बस में सामान रखकर हम लोग त्रिवेंद्रम के लिए रवाना हो गए।


30/4/2022
                     ( पडनाभास्वामी मंदिर त्रिवेंद्रम)
पद्मनाभस्वामी मंदिर केरला भारत देश के सबसे रहस्यमयी और चमत्कारिक मन्दिरों में से एक है,और यह कई हजार वर्षों से सनातन धर्म की अमरता का प्रतीक है। यहाँ मंदिर के गर्भगृह में एक प्रतिमा है जिस पर भगवान विष्णु को  शेषनाग पर शयन मुद्रा में  दिखाया गया है।
30/4/22 को रात 2 AM पर हम सभी लोग त्रिवेंद्रम बस स्टॉप पर पहुचे... बस से उतरते ही होटल पता किया ,होटल वाले ने  किसी ने 2000,किसी ने 3200 किसी ने 2500 किसी ने 4200 एक रात का  चार्ज बताया ...और होटल वालों ने बोला कि सुबह चेक आउट 10 बजे ही करना है।

मुझे कोई होटल समझ न आया...एक होटल मिला 1200 रु का ठीक ठीक था... एक दिन ही रुकना था ... वह ले लिए सुबह के 4 बज गए थे,परिवार के लोगों से सुबह 8 बजे तैयार रहने को कह दिया ...आज 30/4/22 को त्रिवेंद्रम घूमना है।
यह सोचकर कब नींद आ गई कुछ पता न चला ..और हम सो गए।

सुबह  7 बजे हम उठ गए नहा धोकर  रेडी होकर सफेद कुर्ता पैजामा पहनकर पदनाभस्वामी मंन्दिर के दर्शन के लिए रूम से चल दिये..मंदिर सिर्फ वाकिंग डिस्टेंस पर ही था।

त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशन के पीछे वाले गेट से हम पैदल ही धीरे धीरे मंदिर की ओर जा रहे थे। त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशन से मन्दिर की दूरी  1 km है। कुछ ही समय में हम मंदिर पहुँच गए। 

मंदिर के बाहर हम अपने परिवार के लोगों का इंतजार करने लगे... लगभग 2 घँटे इंतजार  के बाद जब परिवार के लोग मंन्दिर  नहीं आए तो दोबारा मन्दिर से होटल की तरफ प्रस्थान कर दिया । 

 रास्ते में रेलवे स्टेशन पर पहुँचकर 110 रू की एक खाने की थाली ली और साउथ इंडियन लंच का आनंद लिया लंच के  कुछ ही समय में हम पैदल ही रूम पर पहुँच गए। 
परिवार वाले रूम पर ताला डालकर गायब थे,कुछ देर मैं होटल के बाहर बेंच पर ही लेता रहा और सो गया था ,
1 घंटे के बाद परिवार  वालों का फोन आया कि फलाने होटल में लंच कर रहे हैं तुम भी आ जाओ, खाने का होटल हमारे कमरे के बिल्कुल सामने था हमने वहां जाकर केरला फ़ूड का लंच किया,बहुत बढ़िया लंच था।

लंच  करके हम सभी अपने रूम पर आ गए,थोड़ी देर में पता चला कि सभी परिवार के लोग मंदिर में दूसरे गेट से जाकर  दर्शन कर के आएं हैं,और हम इनका मुख्य गेट पर 2 घण्टे इंतजार करते करते परेशान हो गए।
दोस्तों मेरे परिवार के लोग अपने आप में अब बहुत बड़ा घुमक्कड़ समझने लगे थे, इतना बड़ा घुमक्कड़ समझने लगे थे कि बता नहीं सकता हूँ...अब दोपहर 2 बजे का समय हो गया था सुबह से दोपहर हो गई मैंने 2 घंटे रूम पर आराम करने का विचार बनाया,परिवार वाले सब सो गए।
 
3 बजे उठकर  हम और अमित पैदल पैदल ही त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशन के पीछे वाले गेट पर जा पहुँचे...यहां से कोवलम  बीच के लिए बस मिलती है।  चौराहे से थोड़ा और आगे चलने के बाद मुझे शाम 4:30 पर कोवलम बीच के लिए बस मिल गई। एक सुंदर सी लड़की से  English में पूछने पर मुझे कन्फर्म हो गया यह बस #कोवलम बीच जाएगी...फिर जब मैं उस बस में चढ़ा तो उस लड़की ने मेरे लिए अपनी सीट छोड़ दी और उठकर दूसरी साइड बैठ गई,और सर कहकर अपनी सीट पर बैठने का निवेदन भी किया।
 
थोड़ी देर में बस चल दी ,भीड़ भाड़ के कारण बहुत धीरे धीरे बस चल रही थी... बस से अंदर से देख रहा था ,यहां लोगों ने अपने घरों में नारियल ,आम और अनार के फल लगा रखे हैं  जो कि देखने मे बहुत सुंदर लग रहे थे। 

ट्रैफिक बहुत था ,बस बहुत धीरे 2 चल रही थी, अंधेरा होने लगा था सोच रहा था कि कमरे से 3 बजे निकलना था, अंधेरा होने से कुछ मिनट पहले हमें बस वाले ने नियर #कोवलम बीच पहुँचा दिया।
पदनाभस्वामी स्वामी मंन्दिर से कोवलम बीच तक का बस का किराया  22 रु था। 
बस से उतर हम लोग कोवलम बीच देखने के लिए भागे, लगभग 1 किलोमीटर सेनटिंग करने के बाद कोवलम बीच दिख गया... कुछ ही समय में मैं  कोवलम बीच के पास पहुँच गया। दोस्तों यह विश्व के सबसे सुंदरों बीचों में एक वह बीच था जिसे मैं अपने सपनों में देखा करता था।
                              
 यहां ताड़ और नारियल के पेड़ बहुत ही सुंदर लग रहे थे ,सुनहरी रेत यहां की खूबसूरती में चारचाँद लगा रही थी। समुद्र की लहरें और मैं एक दूसरे से बात कर रहे थे बहुत ही सुंदर नजारा था कुछ देर इधर उधर घूमने के बाद अंधेरा और हो गया फिर मैंने अमित से कुछ फोटो और वीडियो बनाने को कहा अमित ने मेरे कुछ फोटो लिये और वीडियो भी बनाई। यहां पर एक मस्जिद भी है मस्जिद में शाम की अजान प्रार्थना भी शुरू हो गई थी अंधेरा हो गया था। 
कुछ ही देर में वापस आ मंदिर की तरफ चल दिये मुझे मंदिर में दर्शन जो  करने थे ,बस  वाले ने 22 रू लेकर हम दोनों को पदनाभस्वामी मंदिर के बाहर छोड़ दिया..इस बार भी वो सुंदर सी लड़की मेरी ही बस से मंदिर तक आई..वापस आते समय बस से ही हमने अपने परिवार वालो को फ़ोन कर मंदिर के पास बुला लिया।

रात 8 बजे का समय था....बस से पहुचने से पहले मंदिर के बाहर मेरे परिवार उपस्थित थे। साथ में इस बार धोती कुर्ता भी लाए थे... धोती पहनकर हम लोग मंन्दिर में दर्शन के लिए चले गए,यहां सिर्फ आप धोती पहनकर ही दर्शन कर सकते हो.. 

शाम के समय मंदिर में लगभग कोई 100,200 लोग थे,कोई बहुत ही भव्य पूजा हो रही थी,जिसमें आगे 2 हाथी चल रहे थे    उसके पीछे 100 ,50 लोग कुछ गीत गाते हुए जा रहे थे समय मे सिर्फ गोविंदा 2 ही आ रहा था पर अच्छा बहुत ही लग रहा था... लोगों के पीछे ,2,3 पालकी लेकर चार पाँच लोग चल रहे थे पालकी पर सिंहासन रखे थे।
अमित ने बताया 2 सिंहासन चांदी के हैं,एक सोने का है, यह सब हम लाइन में लगे लगे ही देख रहे थे।  लगभग 2 3 परिक्रमा के बाद रात्रि आरती हो गई उसके बाद फिर लाइन  दर्शन के लिये खुल गई..  कुछ ही समय में शेषनाग पर  शयन मुद्रा पर विराजित  भगवान विष्णु की प्रतिमा के दर्शन हो गए, भगवान के दर्शन कर हम सभी धन्य हुए।
हम दूसरी बार दर्शन कर रहे थे क्यों कि मैं दूसरी बार यहां आया था दर्शन कर मंदिर के बाहर आए,परिवार वाले बोले हम लोगों को यहां का खाना  पसंद ही न आ रहा है हम नार्थ इंडियन  खाना  होटल पर online मंगवा लेंगे और रोटी खाएंगे हम। कुछ ही समय में पता चला कि पास में एक बहुत बढ़िया होटल है ,जहां नार्थ इंडियन खाना मिल जाएगा, तो मेरे परिवार वालों से उस होटल में डिनर के लिए चलने का निवेदन किया।
धीरे 2 लगभग 20 मिनट बादः परिवार वाले उस होटल में डिनर के लिये पहुँचे जो कि 30 sec का रास्ता था, इनको 20 मिनट लग गए थे।

 होटल बहुत शानदार था , बैठने के लिये AC हाल था ,हमने पनीर मिक्सवेज राइस और तवा रोटी का  डिनर किया ,यहां का खाना हम सभी लोगों को बहुत ही स्वादिष्ट लगा, हम 4 लोग थे 650 रु का बिल बना था।  
खाना खाकर हम लोग वापस अपने होटल पर आ गए सामान बगैरह पैक किया,कल सुबह मुरुदेश्वर के लिए निकलना था, सुबह 9 बजे ट्रेन थी उसके बाद हम सभी लोग सो गए इस तरह हमारी एक दिवसीय त्रिवेंद्रम यात्रा समाप्त हुई।

नोट: अब हम लोग मुरुदेश्वर कर्नाटक घूमेंगे।

1/5/2022
त्रिवेंद्रम में 1/5/22 को  हम सभी लोग सुबह 4 बजे उठे, 5 तक  नहा धोकर फ्रेश होकर सामान पैक करके हम सभी ने  अपना रूम चेक आउट कर दिया, हम सभी लोग अपने 12 बैग लेकर त्रिवेंद्रम  रेलवे स्टेशन की तरफ चल दिए।

त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशन होटल से  2 मिनट की दूरी पर था तो 12 बैग स्टेशन तक ले जाते समय मेरे फेफड़े बाहर आ गए थे, मगर फिर भी मैं ईश्वर कृपा से बच गया था...😀😀 

खैर कुछ ही समय में हम सभी लोग त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशनआ गए,समय सुबह के 7 बजे थे।1 घंटे इधर -उधर सड़क प्लेटफार्म पर घुमक्कड़ी की , कुछ समय बाद 9 बजे के आसपास हमारी ट्रेन प्लेटफार्म 2 पर आ गई, तो सामान लेकर प्लेटफार्म 1 से 2 पर आ गए।   

त्रिवेंद्रम -मुम्बई नेत्रावती 16346 हमारी ट्रेन अपने निर्धारित समय पर त्रिवेंद्रम से चल दी, अब हम #केरल से कर्नाटक की तरफ जा रहे थे 2,3 घंटे बाद आलेप्पी आया मैंने  परिवार वालों को बताया कि एक बार  2018 में मैं यहां आलेप्पी भी आ चुका हूँ तब मैंने यहां खूब घुमक्कड़ी की थी। 2-3 घंटे तक  समुद्र में नहाया था ,तब मुझे #आलेप्पी एक शांत  और सुंदर जगह लगी थी। अगर आप बोट में रहने  घूमने  खाने-पीने के शौकीन हैं तो यह आलेप्पी आपके लिये सबसे सुंदर जगहों में से एक है। यह बैकवाटर हब के साथ अरब सागर को देखने के लिए और घूमने के लिये सबसे उपयुक्त स्थान है।
 
2 min के स्टॉप बाद ट्रेन चल दी और कुछ ही देर में मैं सो गया जब उठा तब एर्नाकुलम आ चुका था। दोपहर का 2 बज  गया था। गर्मी अब बढ़ गई थी, एर्नाकुलम में लस्सी पी थी पीकर वापस ट्रेन में आकर बैठ गया।
कुछ ही समय में ट्रेन चल दी और मैं  वापस अपनी बर्थ पर आकर बैठ गया।

थोड़ी देर बाद ट्रेन में एक वेज़ बिरयानी खाई, फिर कुछ देर इधर उधर देखने के बाद अपनी सीट पर लेट गया।
 यहां का रास्ता बहुत सुंदर लग रहा था ,ऊंचे 2 पहाड़ नदी तालाब और कभी 2 तो हमारी ट्रेन बिल्कुल समुद्र के किनारे 2 चलती थी,ऐसा लग रहा था ,यह भारत के सबसे सुंदर रेलवे  ट्रैकों में एक है।यहां नारियल ,केले आम  बहुत मात्रा में पेड़ों पर लदे पड़े थे।दूर 2 तक फैला समुद्र का पानी यहां की हरियाली की सुंदरता में चार चाँद लगा रहा था।

कुछ समय बाद थक हारकर  मैं फिर सो गया ,रात 10 बजे के आसपास मंगलोर आया,उसके बाद मैं सोया नहीं मोबाइल चलाता रहा। 12 बजे सभी लोगों को फिर उठाया पर कोई उठने को तैयार नहीं था। लगभग 2 घंटे बाद #मुरुदेश्वर आ गया। सभी लोग बहुत जल्दी- जल्दी #मुरुदेश्वर स्टेशन पर उतरे।
मुरुदेश्वर स्टेशन पर उतरते ही लगा कि यह एक छोटा सा स्टेशन है। स्टेशन पर 10-20 लोगों के अलावा कोई  नहीं था।

स्टेशन पर ऑटो वाले से मन्दिर तक  पहुँचाने की बात की तो  पहले 300 फिर 200 फिर 100 में मान गया 5 मिनट में ऑटो वाले ने मंदिर तक पहुँचा दिया। 

अब समय 2/1/22 सुबह 3 बजे था।
रात थी, अंधेरा था हम सभी लोग मुरुदेश्वर मंदिर के बाहर किसी दुकान के सामने जमीन पर बैठकर मंदिर के उस भव्य गोपुरम को देख रहे थे। गोपुरम  रात्रि में बहुत ही भव्य लग रहा था। 

कुछ ही देर में यहां पर 2,3 होटल वालों के एजेंट आ गए। रूम के 3000, 2000 2500 रुपये बताने लगे और कहने लगे चेक आउट 10 नहीं तो 11 बजे कर देना, आओ आपको कमरा दिलवा देता हूँ। मैंने कमरा लेने से  सबको मना कर दिया था क्योंकि दर्शन करके हमें आगे #गोवा निकलना था।  
 
कुछ ही समय में 4 बजे सुबह हम मंदिर के पास पहुँचे तो देखा, बहुत सारे लोग दर्शन को आए थे,जो अपनी गाड़ी  में ही सो रहे थे लगभग 30,35 गाड़ियाँ थीं और कुछ लोग वहीं मंन्दिर के बाहर  जमीन पर सो रहे थे।

तो हम सभी लोग चादर  बिछाकर मंदिर के बाहर बैठकर सो गए सुबह 6 AM पर उठे। फ्रेश होकर समुद्र स्नान का विचार बनाया। सभी लोगों  ने बारी 2 से समुद्र में  स्नान  किया। 
यहां पर जो समुद्र स्नान में जो मजा है वो किसी में नहीं है। सुबह 2 समुद्र किनारे लगभग 100,200 लोग थे।
हम अपनी मम्मी के साथ यहां पर नहाए थे।

मुरुदेश्वर सागर तट कर्नाटक के सबसे सुंदर सागर तटों में से एक है। पर्यटकों को यहां धार्मिक स्थल के साथ  प्राकृतिक सुंदरता के भी दर्शन हो जाते हैं।
हम यहां पर अरब सागर में स्नान  के बाद पास में 20 रु देकर टीन के कॉटेज में फिर नहाए थे। दोबारा नहाकर कपड़े पहनकर मंदिर दर्शन का विचार बनाया।
मुरुदेश्वर मंदिर भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व के सबसे सुंदर भव्य दिव्य मंदिरों में से एक है।  यहां अरब सागर के किनारे  भगवान शिव की विश्व की दूसरी सबसे ऊंची प्रतिमा है। 
मुरुदेश्वर मन्दिर का गोपुरम विश्व का सबसे ऊंचा गोपुरम है,इसकी  ऊँचाई 241 फ़ीट है। इसके द्वार पर सजीव हाथियों के बराबर हाथियों की मूर्तियां लगी हुई हैं।
अब समय लगभग 9 A M हो गया था जल्दी से हम सभी लोग मंदिर की लाइन में लग गए थे। अब बहुत भीड़ हो चली थी  हजारों लोग मंदिर में थे हम जल्दी से अपना मोबाइल लेकर मन्दिर की लाइन में लग गए। 15 मिनट बाद हमे मुरुदेश्वर भगवान के दर्शन  हो गए, मुरुदेश्वर भगवान के  दर्शन कर जीवन धन्य हुआ ,मन्दिर के अंदर खूब फोटो क्लिक किये। मंदिर में मोबाइल आप ले जा सकते हो।मंदिर में खूब फोटो क्लिक करने के बाद हम सभी लोग ऊपर भगवान शिव की प्रतिमा तक गए, कुछ समय भगवान से आप सबके लिए प्रार्थना की ,फिर  कुछ फोटो ग्राफी करने के बाद हम नीचे मंदिर आ गए। 
कुछ समय बाद सामान पैक कर गोवा के लिये बस से चल दिये, इस तरह हमने  श्री मुरुदेश्वर भगवान के दर्शन किये वाकई यह मंदिर भारत के सबसे भव्य मन्दिरों में एक है। अगर आपको मौका मिले तो जीवन में एक बार इस मंदिर को जरूर देखिये।

Note ;- अब हम Goa घूमेंगे।

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