द्वारकाधीश जी की यात्रा

                     (द्वारिकाधीश मंदिर )
 24/8 /2018 
बाला जी महाराज मेंहदीपुर के दर्शन  करने के बाद मैं जयपुर पहुँच गया..मेरी ट्रेन ओखा एक्सप्रेस निर्धारित समय से 2 घंटे लेट थी। ट्रेन रात के लगभग10 बजे आई। मैं आराम से  सीट पर जाकर बैठ गया, कुछ ही समय में द्वारका  के लिये  ट्रेन चल दी। लगभग 11 बजे पुष्कर के पास भूख लगी,तो मैंने पूरी सब्जी खाई। उसके बाद मैं सो गया,सुबह उठा तो ट्रेन राजकोट के आसपास थी। राजकोट बहुत बड़ा स्टेशन है। यहां ट्रेन लगभग 1 घंटे रुकी थी। फ्रेश होने के बाद मैंने यहां पर चाय पी,और समोसे खाये थे।

थोड़ा बहुत स्टेशन पर घूम कर मैं अपनी सीट पर बैठ गया। अब लगभग द्वारका 300 किलोमीटर था। अब मैं वापस अपनी सीट पर आकर बैठ गया,और कुछ ही देर में सो गया ,जब मैं उठा तो देखा द्वारका 40 किलोमीटर बचा है। मैंने तुरंत अपना बैग पैक किया,और कपड़े चादर बैग  में ठूसे, अपने जूते पहनकर रेडी हो गया। कुछ ही देर में ट्रेन "द्वारका" पहुँच गई।
                      
द्वारका" हिंदुओ का एक पवित्र महातीर्थ है। यह गुजरात के द्वारका जिले में "अरबसागर" के निकट स्थित है। द्वारका सनातन धर्म के चार धामों में एक,व सप्त पुरियों में एक है। यह भगवान श्री कृष्ण की कर्मभूमि है जब मैं स्टेशन पर उतरा, तो देखा द्वारकाधीश मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज स्टेशन से दिखाई दे रहा है। यहां भीड़भाड़ कम लग रही थी। स्टेशन के बाहर आकर सबसे पहले मैं एक ऑटो से  द्वारकाधीश जी के मंदिर जा पहुँचा।
 द्वारका धीश जी भव्य मंदिर के दर्शन कर अपने आपमें गर्व की अनुभूति हो रही थी। महाप्रभु का आशीर्वाद लेकर अब मैं होटल देखने निकला। 
द्वारकाधीश के मंदिर के आस पास काफी दुकानें थीं। जो मिठाई, फलफ्रूट्स खाने के होटल इत्यादि की थीं। समय दोपहर 3 बजे का था। यहां पर चहल पहल कम थी,लगभग सभी दुकानें बंद थी। एक गुजराती भाई से बात की तो पता चला , 'कि अभी मंदिर 4 बजे खुलेगा,तब सब दुकानें खुल जायेगी। मंदिर के आसपास बहुत से रूम होटल थे। कुछ देर होटल देख कर मैंने एक 300 रुपये का सिंगल बेड रूम ले लिया,रूम ठीक था। रूम में जाकर सबसे पहले मोबाइल चार्जिग पर लगाकर मैं नहाने धोने के इंतजाम में लग गया था। पास की मार्केट से जाके एक साबुन ले आया, फिर 20 मिनट में नहा धोकर फ्रेश हो गया। साफ स्वच्छ कपड़े पहनकर मैं मंदिर के दर्शन के लिये चल पड़ा। मंदिर के सामने अब बहुत ज्यादा भीड़ थी, सभी दुकानें खुल चुकी थीं। बहुत सारे बच्चें प्रसाद गुलाब के फूलों की फूल माला इत्यादि बेच रहे थे। पास में मोबाइल बैग सबमिट करने वाला काउंटर भी था। मैं रूम से मोबाइल ले आया था जो कि अब मुझे काउंटर पर जमा करना था। 
                      ( द्वारिकाधीश मंदिर )
मोबाइल मंदिर में नहीं ले जाने देते हैं,मोबाइल सबमिट कर मैं अब मंदिर वाली लाइन में लग गया। लगभग 30 मिनट बाद मुझे मंदिर में प्रवेश मिल गया। मंदिर के अंदर बहुत से पुजारी लोग थे,जो कि गुजराती बोल रहे थे मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। कुछ देर मंदिर में घूमने के बाद मुझे द्वारकाधीश के दर्शन प्राप्त हो गए। फिर तुरंत पुजारी जी ने पर्दा डाल दिया,भगवान को भोग लगाने के लिये। द्वारकाधीश मन्दिर में सभी मंदिरो के दर्शन कर मैं कुछ ही समय में मंदिर के बाहर आ गया। द्वारका नाथ के दर्शन कर असीम शांति का अनुभव हो रहा था।
मंदिर के अंदर 2.25 फीट ऊंची, काले पत्थर में तराशी द्वारकाधीशजी की मूर्ति भगवान श्री कृष्णा के होने की अनुभूति करा रही थी। इतना सुंदर और भव्य मंदिर मैं पहली बार देख रहा था जगह जगह द्वारका धीश के भजन लोग गा रहे थे।

श्रद्धालु लोग द्वारका नाथ की आराधना कर रहे थे..यह सब देखकर एक सुखद अहसास की अनुभूति हो रही थी। द्वारकाधीश मंदिर में पांच मंजिलें हैं,72 स्तम्भ हैं। मंदिर की दीवारों पर देवताओं की कलाकृतियां सुशोभित हो रही थीं। मंदिर के शिखर पर 52 गज का ध्वज सुशोभित हो रहा था। यहाँ के लोग द्वारकाधीश को एक राजा की तरह पूज रहे थे। द्वारका नाथ के दर्शन करके अब मैं मंदिर के बाहर आ गया था।   द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने के बाद मैं द्वारका बीच की तरफ चल दिया। मैंने आजतक समुद्र को नहीं देखा था। तो मन में समुद्र को लेकर बहुत उत्सुकता भी  थी,अजीब से विचार मन में आ रहे थे,कि समंदर कैसा होगा ? पानी कैसे आता होगा ? लहर कैसे आती होगी? यही सब सोच कर मैं द्वारिकाधीश मंदिर से लगी गली से होते हुए सुदामा सेतू की तरफ पैदल चल दिया। सुदामा सेतु बहुत सुंदर बना हुआ है। गोमती घाट पर बहुत ही सुंदर नजारा था। पर्यटक भी ठीक ठाक थे। मैं धीरे2  द्वारका के समुद्र की ओर बढ़ रहा था। कुछ पर्यटक ऊंट की सवारी कर रहे थे..कुछ ही समय में मैं द्वारका के समुद्र के पास पहुँच गया।
यहां पर सुनहरी रेत,ठंडी ताजी हवा में चलने में बहुत ही आनंद आ रहा था। समुद्र से खूब ऊँची ऊँची लहरें आ रहीं थी। कुछ पर्यटक स्नान कर रहे थे। कुछ समुद्र से नग खोज रहे थे, तो कुछ समुद्री जीवजंतु जैसे केकड़े आदि को निहार रहे थे। कुछ देर मैंने भी केकड़े और नगों की खोज की,यह सब मेरे लिये नया अनुभव था। लोग बता रहे थे,कभी कभी डॉल्फिन भी यहां दिख जाती है।  यह द्वारका का सबसे सुंदरबीच है। मैं बहुत देर तक खूब दूर से समुद्र से आती हुई लहरों को निहारता रहा, कुछ ही देर में एक ऐसी लहर आई कि उसने मुझको नहला दिया तब ऐसा लगा समुद्र देव कह रहे हो "आओ स्नान करो और पुण्य प्राप्त करो"। फिर समुद्री जल से भीगने के बाद लगभग 1 घंटे तक लहरों से खेलता रहा। खूब फोटो लिये ,और वीडियो बनाई,अब अंधेरा होने लगा था,फिर मैंने अपने रूम की तरफ चलने का विचार बनाया।
                     (द्वारका बीच )
समुद्र दर्शन के बाद अब मैं वापस अपने होटल की तरफ चल दिया...अब यहां पर भीड़भाड़ भी कम हो रही थी। सभी पर्यटक अपने 2 होटलों और आशियाने पर जा रहे थे। यहाँ पर एक सेतु है, जिसको सुदामा सेतु कहते हैं यह रात्रि में सुंदर रोशनी से नहाया हुआ लगता है।
                        (सुदामा सेेतु)
फिर थोड़ी देर में "द्वारकाधीश मंदिर"पहुँच गया। मंदिर में एक बार फिर दर्शन करने के बाद मंदिर परिसर में आ गया। अब भूख भी लग रही थी। मंदिर से लगे हुए सैकड़ों खाने के होटल हैं। यहाँ पर आपको आराम से गुजराती , पंजाबी, हरियाणा की थाली भोजन में मिल जायेगी। रात्रि भोजन करने के बाद थोड़ा  घूमने के बाद पता चल गया था कि सुबह एस टी की बस बेट द्वारका तक जाती है। सुबह जल्दी निकलना था।"बेट द्वारका" का प्लान था  तो अब मैं रूम पर जाकर सोना चाहता था। रूम पास में ही था ,कुछ समय में रूम पर पहुँच कर सो गया।

डे2 
सुबह 8 बजे नहा धोकर  कपड़े पहनकर मैं एस टी बस स्टैंड की  तरफ चल दिया। बस स्टैंड पर पहुँच कर स्वादिष्ट पकौड़ी और चाय पीकर, 80 रुपये की टिकट स्लिप लेकर मैं बस में बैठ गया। कुछ ही देर में बस चल दी। लगभग 20 मिनट बाद बस  रुकमणी मंदिर पहुँच गई। सबसे पहले जाकर मैंने यहाँ  दर्शन किये, यह मंदिर बहुत ही सुंदर था। द्वारिकाधीश मंदिर की तरह यहां भी इसके शिखर पर ध्वज लहरा रहा था। थोड़ी फोटोग्राफ लेने के बाद मैं बस में आकर बैठ गया।  
                      (रुक्मणी मंदिर )
गोपी तालाब :- अब हमारा पड़ाव था गोपी तालाब, लगभग 15 मिनट में मेरी बस गोपी तालाब पहुँच गई। यहां पर एक तालाब था। तालाब सूख गया था। लोग यहाँ से चंदन ले जाते हैं। एक व्यक्ति ने मुझसे भी चंदन लेने के लिए निवेदन किया,पर मैंने लिया नहीं था। 

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग ;-  यह भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग मंदिर है। यह 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक है। यहाँ भगवान शिव की एक बहुत ही सुंदर प्रतिमा भी है। यह द्वारिका से 20 किलोमीटर हैं। गोपी तालाब से चलने के बाद 25 मिनट में बस नागेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर पहुँच गई। प्रसाद लेकर मैं मंदिर की लाइन में लग गया। भगवान के ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शन कुछ ही समय में प्राप्त हो गए। थोड़ी बहुत फोटोग्राफी के बाद मैं मंदिर में पुनः बस में आकर बैठ गया। यहां भगवान शिव की बहुत सुंदर प्रतिमा लगी है।
                       (नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर)
 बेट द्वारका ;- 

अब मेरा आज का आखिरी पड़ाव था बेट द्वारिका। कुछ ही समय में बस चल दी और अब बेट  द्वारका के लिए जहां से नाव मिलती हैं, बस ने हमको यहाँ पर लाकर छोड़ दिया। बस ने हमको आधे किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया था। सामने अथाह अरबसागर दिख रहा था। कुछ ही समय में नाव पर पहुँच कर बैठ गया। नाव का किराया 20 रुपये था। कुछ ही समय में नाव चलने लगी। नाव से मैं झील में बहुत घूमा था पर अरबसागर में मैं पहली बार घूम रहा था। समुद्र से आती लहरें बहुत ही सुंदर लग रहीं थीं। लगभग 20 मिनट अरब सागर में घूमने के बाद मैं बेट द्वारका पहुँच गया।


.          (अरबसागर होते हुए बेट द्वारका)

बेट द्वारका पहुँच कर सबसे पहले मैंने कृष्णा मंदिर के दर्शन की योजना बनाई। कुछ ही समय में मैं कृष्णा मंदिर पहुँच गया...सामने काउंटर पर मोबाइल और बैग जमा करने के बाद प्रसाद लेकर मैं मंदिर की लाइन में लग गया...कुछ ही समय में भगवान के दर्शन कर मैं मंदिर के बाहर आया। समय कम होने की वजह से हनुमान जी के टीले नहीं जा सका...थोड़ी देर बेट द्वारका घूमने के बाद मैं  अपनी नाव की तरफ आ गया। अब समय दोपहर का एक बज रहा था। अरब सागर देखने में बहुत सुंदर लग रहा था...बेट द्वारिका से पुल से  धीरे 2 मैं अपनी नाव की तरफ बढ़ रहा था ।
               (श्री कृष्णा मंदिर बेट द्वारका)

नाव में बैठकर पुनः20 मिनट में "ओखा बंदरगाह" की तरफ पहुँच गया। अब मुझे यहां पर गर्मी बहुत सता रही थी। यहाँ पर बच्चें  दही बेच रहे थे,2 गिलास दही पीकर मैं अपनी बस में आकर  बैठ गया। "जो लोग बस तक नहीं आ पाए थे "उनको छोड़ कर कुछ ही समय में बस चल दी,और लगभग एक घंटे बाद बस द्वारका सिटी बस स्टैंड पहुँची गई, बस स्टैंड पर पहुँच कर मैंने नेट पर देखा कि एक अरब सागर के बीचों बीच बहुत ही सुंदर मंदिर है। जो यहां से मात्र डेढ़ किलोमीटर है। मैं तुरंत पैदल ही इस मंदिर की तरफ चल दिया।  इस समय द्वारका का मौसम बहुत ही सुहावना हो गया था,.हल्की -हल्की बारिश हो रही थी बहुत तेज हवा चल रही थी।


भड़केश्वर महादेव मंदिर :-
कुछ ही समय में मैं भड़केश्वर  महादेव मंदिर पहुँच गया था ,यह मंदिर अरब सागर के बीचों बीच बना एक भव्य मंदिर है। इस मंदिर का दृश्य देखने के बाद आप जीवन भर भूल नहीं पाएंगे। जब समुद्र में ज्यादा पानी होता है,तो इस मंदिर की सीढ़ियां पानी से डूब जाती हैं। स्थानीय लोग बताते हैं समुद्र देव साल में एक बार महादेव का जलाभिषेक जरूर करते हैं।  यह मंदिर वास्तव में मेरे देखे गए अब तक के सबसे सुंदर मंदिरों में से एक था। समुद्र से उठती लहरें बहुत ही सुंदर लग रही थी। लगभग एक घंटा मंदिर पर बिताने के बाद मैं वापस द्वारका मंदिर के पास आ गया। यहाँ पर मैंने 300 रुपए में तीसरी मंजिल पर एक होटल लिया। इस समय लगभग शाम के 4 बज रहे थे। होटल पर स्नान करके मैं दोबारा द्वारिका धीश मंदिर की तरफ घूमने निकला। कुछ ही समय में मैं मंदिर के पास पहुँच गया। और द्वारिका धीश मंदिर के दर्शन का विचार बनाया। मंदिर में   अंदर पहुँचने में लगभग 10 मिनट लगे थे। कुछ ही समय में द्वारिका धीश के दर्शन प्राप्त हो गए। मंदिर के अंदर सभी लोग "द्वारकानो नाथ मारो राजा रणछोड़ छे" यह भजन गाकर श्री कृष्णा भगवान की आराधना कर रहे थे। यहां पर मैं एक अलग ही संस्कृति से रूबरू हो रहा था,जो कि बहुत ही सुंदर लग रहा था। कुछ ही समय में मैं मंदिर के सामने एक होटल पर खाना खाकर अपने होटल के रूम में जाकर सो गया।
                 (भड़केश्वर महादेव मंदिर )
डे 3 
आज सुबह 8 बजे उठकर मैं नहा धोकर "द्वारकाधीश मंदिर" के दर्शन के लिये अपने होटल से निकला। 
कुछ ही समय में द्वारिकाधीश के  दर्शन करने के बाद मैं मंदिर प्रांगण में आ गया। उसके बाद मैंने गोमती घाट पर भ्रमण का विचार बनाया। द्वारिकाधीश मंदिर के पीछे गोमती नदी और अरबसागर का संगम होता है। बहुत ही पवित्र स्थान है। काफी देर यहां बिताने के बाद मैंने खूब फोटोग्राफी की कुछ लोग गोमती नदी में स्नान कर रहे थे। समय लगभग दोपहर 2 बजे का था।  
               (गोमती घाट द्वारका)

यहां से द्वारिका बीच का सुंदर नजारा भी दिख रहा था। लगभग 2 घंटे यहां बिताने के बाद मैंने अपने होटेल चलने का विचार बनाया। "यह द्वारका में मेरा आखिरी दिन था" इसलिये होटल पर चलकर बहुत सारी पैकिंग भी करनी थी,तो मैं जल्दी से जल्दी अब होटल पहुँचना चाहता था। अब मैं गोमती घाट से द्वारिका धीश के मन्दिर आ गया था।
द्वारिकाधीश मंदिर के शिखर पर ध्वज परिवर्तन हो रहा था यह दिन में कई बार होता है। हर बार ध्वज का अलग रंग होता है। ध्वज परिवर्तन का अविस्मरणीय दृश्य बहुत ही सुंदर लग रहा 
था। द्वारिकाधीश मंदिर का चित्र नीचे है।


                            (द्वारिकाधीश मन्दिर)
अब लगभग शाम हो चुकी थी। भगवान द्वारिका धीश का आशीर्वाद लेकर कुछ ही समय में मैं अपने होटल पहुँच गया था होटल  में सारा सामान पैक कर मैं 9 बजे सोमनाथ जाने के लिये  द्वारका रेलवे स्टेशन पर पहुँच गया था। 

राजा धिराज द्वारिकाधीश भगवान के कुछ चित्र 


     द्वारिका धीश यात्रा समाप्त

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