चूरधार यात्रा हिमाचल

मै भोले बाबा का परम भक्त हूं। और बाबा की कृपा से हमको भोले बाबा के प्रसिद्ध स्थानों को घूमने का सौभाग्य प्राप्त होता रहा है ।आज आपको लेकर चलते हैं, हिमाचल प्रदेश में चूरधार की यात्रा पर चूरधार भोले बाबा का स्थान है बहुत ही खूबसूरत जगह है।  कभी जीवन में एक बार भी कहीं घूमने का मौका मिले तो मै इस जगह पर जाकर निराश नहीं होऊंगा वाकई में भोलानाथ ने शानदार खूबसूरती यहां बिखेरी है। 


हम चूरधार धरतीपुत्र अक्षय के साथ गए थे इस यात्रा का प्रोग्राम अक्षय ने ही बनाया था , प्रोग्राम जनवरी से बन रहा था और फिर फरवरी मार्च  के वाद 27 अप्रैल19 को चूरधार का प्रोग्राम तय हुआ। इस यात्रा पर मेरा एक और मित्र अनमोल मेरे गृह नगर से मेरे साथ चलने के लिए तैयार हो गया । अब हम उत्तरप्रदेश से 4लोग अंबाला से अक्षय भाई , राजीव जी बदायूं, पवन भाई रेवाड़ी , अनमोल , कई लोग चूरधार चलने के लिए सुवह 7 अंबाला रेलवे स्टेशन पहुंच चुके थे। 

कुछ ही समय में हम लोग अपनी टीम के साथ गाड़ी में सवार होकर अंबाला से नोहराधार के लिए चल दिए, लगभग 60 km वाद पहाड़ी रास्ता शुरू हो चुका था। अक्षय भाई का प्लान के मुताबिक हम लोगों ने रेणुका झील के दर्शन दिए।  झील में मछलियां बहुत है। प्राकृतिक वातावरण अच्छा है। इस झील की मान्यता भगवान परशुराम से जुड़ी है।यहाँ पर अक्षय भाई , राजीव जी , पवन भाई स्नान करने में बिज़ी हो गए मै फोटो लेने में व्यस्त हो गया। हिमाचल प्रदेश में कुदरत ने जबरदस्त सुंदरता बिखेरी है। लगभग एक घंटे वाद हम लोग फिर नोहराधार के लिए रवाना हुए। और हम लगभग शाम 6;30 बजे नोहराधार पहुंच गए।

यहाँ पर धर्मशाला लेकर हम लोग नोहराधार घूमने निकलें, अब भूख भी लगने लगी थी यह मेरे जीवन का पहला ट्रेक था तो मै बहुत खुश था।  हम लगभग 15 लोग खाना खाने के लिए साथ में निकलें और हमने और अनमोल ने पनीर आलू रोटी चावल के साथ खाना खाया, पनीर मुझे बहुत पसंद है। खाना खाकर हम लोग कुछ जरूरी सामान जैसे मैगी बिस्कुट चाकलेट केले सेब इत्यादि लेकर चल दिए, क्यों कि ट्रेक के दौरान इस सबकी बहुत जरूरत पढ़ने वाली थी लगभग 18 km का ट्रेक था। जिसमे जबरदस्त घने जंगल से गुजरना था। 

चूरधार हिमाचल प्रदेश में जिला सिरमौर में भोले बाबा का एक स्थान है। चूड़धार चोटी यह जो चोटी आउटर हिमालयन रेंज की हाईएस्ट चोटी हैं। अगले दिन सुवह 6बजे हम सभी लोगों ने ट्रेकिंग की शुरू कर दी। हम लगभग 15 लोग थे। अक्षय भाई के दिशानिर्देश पर हम लोग आगे घने जंगल की तरफ बढ रहें थे हमे ट्रेकिंग का कोई अनुभव नहीं था। एक किलो मीटर चलने के वाद ही मै थक गया क्या करता ये पहाड़ होते ही ऐसे हैं सबको थका देते है। हम और तेज नारायण भाई देवरिया वाले आराम आराम से सबसे पीछेअपनी मौज मस्ती में चल रहें थे। मै हमेशा सबसे पीछे रह जाता था। क्यों मुझे पहाड़ो पर चलने का कोई अनुभव नहीं था। जितना भी चला हूँ सिर्फ शौकिया ही चला था।आज तो मै चूरधार पर जा रहा था। कुछ ही समय में लगभग 4किलो मीटर वाद हम देवदार का घना जंगल शुरू हो गया था। रात में किसी ने कह दिया था की जंगल में भालू तेंदुआ भी है इस वजह से नींद भी न आयी थी और आज 20 किलो मीटर चलना था खैर जैसे तैसे हम लोग 6 किलो मीटर बहुत गए। 
चूरधार चोटी 13000 फुट की ऊँचाई पर है ।यहां तक पहुंचने के लिए मै #20 किलोमीटर लंबे पहाड़ी ट्रैक पर चलने की कोशिश कर रहा था ।और घने पहाड़ और देवदार  के घने जंगल से गुजरना  रहा था।  यह बहुत ही खतरनाक जंगल था पूरा जंगल देवदार और चीड़ के पेड़ो से घिरा हुआ था ।इस जंगल में सभी जंगली जानवरों का खतरा था । भालू और तेंदुए तो काफी मात्रा में है ऐसा वहां के निवासी बताते है। 
 
थोड़ा और चलने के वाद देवदार और चीड़ का घना जंगल शुरू हो गया लगभग 8 किलोमीटर की ट्रैकिंग में ना कोई इंसान मिला ना कोई दुकान मिली और भोले बाबा की कृपा से ना कोई जानवर मिला । जानवरों के शव  हड्डियां और #कंकाल काफी मात्रा में मिले जो इशारा करते थे कि यहां जानवर काफी है । एक बार हम लोग भालू की आहट से डर गए पर हुआ कुछ नहीं हम 12 लोग थे। पर इस जंगल में जंगली जानवर का बहुत खतरा है । 

पौराणिक कथाओं में शिव भक्‍त चूरु और उनके बेटे का जिक्र मिलता हैकि एक बार  चूरु चूरधार  दर्शन के लिए आया था । उसी समय अचानक एक बड़ा सा सांप न जानें कहां से आ गया। देखते ही देखते वह सांप चुरु को काटने के लिए आगे बढ़ने लगा। तभी उसने भगवान शिव से अपने प्राणों की रक्षा करने की प्रार्थना की। कुछ ही क्षणों में एक विशालकाय पत्थर उस सांप के ऊपर जा गिरा। 


 इस घटना के बाद से मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा बढ़ती गई। साथ ही उस जगह का नाम भी चूड़धार के नाम से प्रसिद्ध हो गया। 
  • शेष दूसरी पोस्ट में 

    चर धार के विषय में मान्यता है -:


 आदि शंकराचार्य ने हिमाचल प्रवास के दौरान शिव की उपासना यही की थी । शेष दूसरी पोस्ट में

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