मेरी पहचान आप हैं आदरणीय पिता जी
- पिता गंगोत्री की वह बूंद जो गंगा सागर तक पवित्र करने के लिए धोता रहता है एक-एक तट, एक-एक घाट।
पिता की यादों को संभाल पाना किसी भी व्यक्ति के लिये बहुत मुश्किल है। वह व्यक्ति किस्मत वाला होता है जिन्हें पिता का प्यार और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पिता की यादों को संभालने की मैंने बहुत कोशिश की है,पर उनकी यादों को संभाल पाना मेरे लिये बहुत मुश्किल है। पिता जी आपके लिये लिखना और आपकी थाह का अनुमान लगा पाना मेरे लिये असंभव है।
पिता जी मात्र अल्प आयु में ही हमको छोड़ कर देव लोक चले गए। फिर मैं अपने बाबा परम पूज्य श्री राज किशोर शर्मा जी के अनुशासन तले बढ़ा हूँ। उनकी असीम कृपा थी मुझ पर ,वह मुझसे बहुत स्नेह करते थे।
पिता जी की एक बात याद है। पिता जी कहते थे "मैं मृत्यु से नहीं डरता बस अपनी कीर्ति के कलंकित हो जाने से डरता हूँ"।
पिता जी बहुत ही विराट व्यक्तित्व के धनी थे। वह मुझसे बहुत स्नेह करते थे। मैं शायद उस लायक नहीं बन पाया,फिर भी पिता के लिये मेरे ह्रदय में अपार श्रद्धा रहेगी।
पिता जी की ज्यादा स्मृति मेरे पास शेष नहीं हैं। फिर भी पिता जी हमारी स्म्रतियों में हमेशा रहेंगे।
आप हमारे धर्म में, कर्म में, व्यवहार में,संस्कारों में हमेशा जीवित रहेंगे।
आप को कोटि कोटि प्रणाम है। पिता जी विनम्र श्रद्धांजलि😢
आदरणीय पिता अरविंद शर्मा जी का छाया चित्र नीचे है।
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