केदारनाथ यात्रा


24 मई 2019 को मैं और शिवांग बाबा केदारनाथ की यात्रा के लिए शाहजहाँपुर रेलवे स्टेशन से सुबह 9 बजे  इलाहाबाद हरिद्वार एक्सप्रेस में सवार होकर हरिद्वार के लिए निकले। ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं था ,फिर भी आराम से सीट मिल गई थी ट्रेन लगभग खाली थी।लगभग 6 घंटे बाद हम लोग हरिद्वार पहुंच गए थे। 

अब गर्मी बहुत सताने लगी थी ,सोचा कि हर की पौड़ी पहुंचकर गंगा स्नान करते हैं। अब मैं और शिवांग हर की पौड़ी के लिए स्टेशन से चल दिए। कुछ समय बाद हर की पौड़ी घाट पर पहुंच गए। कुछ समय घाट पर बैठने के बाद हम लोगों ने गंगा स्नान का विचार बनाया। लगभग आधे घंटे तक हम लोगों ने गंगा जी में स्नान किया, फिर गंगा मैया से विश्वकल्याण की प्रार्थना की। इस समय गंगा घाट की दिव्यता और भव्यता स्वर्ग से भी सुंदर लग रही थी। गंगा मंदिर पर गंगा मईया का आशीर्वाद लेकर हम लोग ऋषिकेश जाने के लिये  हरिद्वार बस स्टेशन पहुँचे। कुछ ही समय में हमको बस मिल गई। रात के लगभग 8 बज चुके थे। बस में हमने शिवांग भाई का मोबाइल लेकर उनकी फेसबुक आई डी से गंगा स्नान के फोटो फेसबुक पर अपलोड कर दिये। बस लगभग 2 घंटे बाद ऋषिकेश बस स्टैंड पहुँच गई।

ऋषिकेश बस स्टैंड पर हम लोग लगभग रात के 10:00 बजे पहुंचे थे। बस स्टैंड पर काफी भीड़ थी 8,10 बसें लगी थी व 2,4 चाय की दुकानें खुली थी। मैंने सोचा कि यहां पर होटल लेकर रात में रुक लेते हैं और सुबह  केदारनाथ के लिए चला जाए ,पर यह मुमकिन नहीं था क्योंकि मुझे पता था कि बाबा केदारनाथ के लिए यहां से बस सुबह 4:00 या 5:00 बजे जल्दी ही जाती है। फिर मैंने बस स्टैंड पर ही रात बिताने का विचार बनाया था लगभग 11;30 का समय हो चुका था।अब मुझे बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए बस में बुकिंग करानी थी।  
लगभग तीन बजे बुकिंग काउंटर खुला। फिर हमने बुकिंग करवाई और गाड़ी में बुकिंग रुद्र प्रयाग तक थी तो हम लोगों ने रुद्रप्रयाग तक ही पहुँचना उचित समझा। बस में बैठते ही मैं सो गया था बस अपने निर्धारित समय 6 बजे चली थी तब हल्का अंधेरा ही था ,कब रुद्रप्रयाग आ गया पता ही न चला था। लगभग 10 बजे  रुद्रप्रयाग पहुँच गए। रुद्रप्रयाग में कुछ देर  विश्राम और नाश्ता करने के बाद हम लोग यहां गुप्त काशी के लिए एक टैक्सी में निकल लिये। कोई भी गाड़ी, बस, टैक्सी सीधे सोनप्रयाग तक नहीं जा रही थी। अब बहुत गर्मी लग रही थी। लगभग दो घंटे बाद उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों को निहारते हुए हम लोग गुप्त काशी पहुँचे। गुप्तकाशी में मैंने  और शिवांग ने एक छोटे से होटल में चाय पी थी। चाय की  दुकान के सामने से ही एक टैक्सी सोनप्रयाग तक जा रही थी। हम लोग चाय पीकर तुरंत टैक्सी में बैठ गए। लगभग 30 मिनट बाद टैक्सी चल पड़ी और हम लोग सोनप्रयाग के लिये चल पड़े।अभी तक हम लोगों को गर्मी ने सताया था पर अब हवा में ठंडक थी । आसमान में बादल थे ,पहाड़ और सुंदर और हरे भरे लग रहे थे। कुछ समय बाद हम लगभग फाटा ही पहुँचे थे कि खूब जोरदार बारिश हो गई। अब ठंड का अनुभव होने लगा था। बारिश जो हुई थी वह सोनप्रयाग तक नहीं रुकी। लगभग आधे घंटे बाद हम लोग सोनप्रयाग  पहुँच गए। अब भूख  बहुत तेज लगी थी। सामने केदारनाथ का भंडारा चल रहा था। भंडारे में पहुँच कर छोले की सब्जी पूरी और चाय खाई थी। अब रास्ते की थकान बहुत हो रही थी। सोनप्रयाग पार्किंग में लगभग हजारों गाड़ी लगी थीं।पीक सीजन था। कुछ समय बाद हम लोग सोनप्रयाग में होटल देखने निकले। 1 घंटे लगभग होटल देखने के बाद हम लोग थक चुके थे। बारिश रुकने का नाम ही न ले रही थी।तय हुआ कि अब सोनप्रयाग में कमरे नहीं लेंगे सीधे बाबा केदारनाथ की चढ़ाई शुरू कर देते हैं। 
बाबा केदारनाथ  मैं भी पहली बार जा रहा था। 2013 में मैं जब बाबा केदार के दर्शन के लिए आया था,तो महा जलप्रलय आ गई थी फिर 4 दिन श्रीनगर में ही रुकने के पश्चात मैं वापस  घर चला गया। अब 2019 में शिवांग के साथ आया था, तो 2013 जल प्रलय की यादें मन में थोड़ा सा भय उत्पन्न कर रहीं थीं।  सोनप्रयाग में एक चाय की  दुकान पर बैठते हुए मैंने और शिवांग ने निर्णय किया कि चलो ट्रैक शुरू कर देते हैं।

बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिये अब मैंने और शिवांग ने सोनप्रयाग से ट्रैक शुरू कर दिया। 20 रुपये टैक्सी वाले को देकर मैं और शिवांग गौरी कुंड पहुँच गये । अब यहां से बाबा केदारनाथ की यात्रा के लिये चढ़ाई शुरू करनी थी। रास्ते में ट्रैक का कोई अनुभव नहीं था। मैं शिवांग के साथ पहली बार केदारनाथ जा रहा था। अब शाम के 6  बज रहे थे। हम लोग गौरी कुंड से चढ़ाई शुरू कर रहे थे। गौरी कुंड में मंदाकिनी जी का दृश्य बहुत सुंदर लग रहा था। यह वही मंदाकिनी थी जिन्होंने 2013 में जलजला ला दिया था। मैं यही सोच रहा था। रास्ते में घोड़े वालों ने चलना मुश्किल कर रखा था। लोगों से बात करके पता चला  कि यह घोड़े वाले कुछ समय में बंद हो जाएंगे।

पैदल यात्रा में श्रद्धालुओं का जोश देखते ही बन रहा था... सभी श्रद्धालु बम बम भोले औऱ हर हर महादेव के जयकारों के साथ चढ़ाई चढ़ रहे थे...जैसे ही श्रद्धालुओं को थकान लगने लगती...वैसे ही हर हर महादेव का नारा श्रद्धालुओं में नया जोश भर देता। मैंने और शिवांग ने  भी पैदल यात्रा शुरू की...श्रद्धालुओं से बात करते हुए हम लोग भी आगे बढ़ रहे थे...रास्ते के एक तरफ ऊंचे पहाड़ थे...तो दूसरी तरफ कल – कल कर बह रही थी केदारनाथ से आ रही मंदाकिनी नदी। जैसे जैसे हम ऊंचाई पर पहुंच रहे थे...वैसे वैसे मौसम में ठंडक और घुलती जा रही थी...मंदाकिनी ऊंचाई से किसी  बहुत ही सुंदर नहर की तरह दिखाई देने लगी थी। बर्फ की सफेद चादर से ढ़के पहाड़ दिखाई दे रहे थे...जो अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे...बर्फ से ढके पहाड़ों को देखकर आनंद आ रहा था...मन कर रहा था कि जल्दी से इन सफेद पहाड़ों के बीच पहुंच जाएं...लेकिन अभी हम चार  किलोमीटर ही चढ़े थे कि शाम भी हो चुकी थी। अब लगभग अंधेरा छा गया था। रात हो चुकी थी, कहीं- कहीं पर लाइट भी नहीं थी। लोग अपना मोबाइल टॉर्च आदि लेकर यात्रा कर रहे थे। ठंड अब बहुत बढ़ चुकी थी।

केदारनाथ के पहले पड़ाव जंगलचट्टी लगभग ( 4 किलोमीटर ) पर हम लोग पहुँच चुके थे। यहां पहुंच कर कुछ नाश्ता किया था,चाय और स्वादिष्ट पापड़, कुछ देर होटल पर बैठने के बाद हम लोग चल दिये। इस समय शाम हो चुकी थी,अंधेरा बढ़ गया था। लगभग खच्चर वाले अब बंद हो चुके थे। मैं और शिवांग अब आगे की ओर बढ़ रहे थे। धीरे- धीरे हम लोग चढ़ाई चढ़ रहे थे।  यहां पर कई खच्चर मरे हुए पड़े थे। चढ़ाई के दौरान लाइट या रोशनी कहीं पर थी, कहीँ पर नहीं थी।

 हम लोग बहुत ही आराम से चढ़ाई चढ़ रहे थे। रामबाड़ा 4 किलोमीटर अब बचा था। अब हम लोगों को ठंड सताने लगी थी। रास्ते के दौरान अब इक्का दुक्का लोग ही दिख रहे थे, रात के 11 बज चुके थे। खच्चर वाले अब नहीं चल रहे थे। मैं पहली बार केदारनाथ जा रहा था,पर बाबा के लिये ह्रदय में अपार श्रद्धा थी। बम बम भोले का नाम लेकर  रात के 12:30 हम रामबाड़ा लगभग (8 किलोमीटर )पहुँचे। सोचा यहां कोई होटल या दुकान में रुक जाएंगे। पर यहाँ पर कोई भी दुकान पर रुकने की  व्यवस्था न हुई, थक हारकर यहां एक कुर्सी पर हम लोगों ने बैठ कर सोचा कि रुकना ठीक नहीं है,चलते रहते हैं क्योंकि कहीं रुकने की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। रात में बहुत ठंड हो थी। जब हम लोग रामबाड़ा पुल पर पहुँचे,तो मैं  पुल के हिलने पर डर कर पीछे हट गया। बाद में सब समझ कर आगे दोबारा चढ़ा। हम लोग रामबाड़ा से एक किलोमीटर ही चले होंगे कि अब तो लाइट भी चली गई और डर सताने लगा। ट्रेक पर सिर्फ मैं और शिवांग और कोई नहीं था। रात का एक बज रहा था। पूरे ट्रेक के दौरान शिवांग मेरे साथ ही रहा था। अंधेरे में कुछ समझ न रहा था। सोचा कुछ था और  हो कुछ और रहा था। थकान अब बहुत हो चुकी थी। मैं रात से बहुत डर रहा था। अब इस समय बाबा का कोई भी भक्त नहीं मिल रहा था। भोले का नाम लेकर कछुआ चाल से हम लोग आगे बढ़ रहे थे। बाबा केदारनाथ की इस यात्रा पर अब मैं और शिवांग ही चढ़ाई कर रहे थे। अब दूर दूर तक कोई न दिख रहा था। मन में अजीब सा भय उत्पन्न हो रहा था।
 थकान बहुत हो गई थी। अब रात के 2 बज रहे थे। मंदाकिनी घाटी से कल कल की आवाज अब बहुत तेज आ रही थी। नीरज मुसाफिर के ब्लॉग पर पढ़ा था कि उच्च हिमालय में जंगली जानवरों का बहुत खतरा रहता है। यही सोच कर डर भी लग रहा था। राम बाड़ा से यहाँ तक एक्का दुक्का लोग ही मिले थे। उन्होंने बताया कि कुछ लोग केदारनाथ में मुक्ति पा गए हैं। पूछने पर बताया इसकी वजह ठंड और बर्फबारी थी। रास्ते में कई खच्चर मरे हुए पड़े थे। पानी की भी व्यवस्था नहीं थी। चढ़ाई के दौरान झरने से हमने अपनी पानी की  बोतल  भरी थी। रास्ते में भोले का नाम लेकर कई जगहों पर विश्राम कर कछुआ चाल से मैं और शिवांग आगे बढ़ रहे थे।

रात बहुत हो गई थी, ठंड और भूख और थकान शरीर पर हावी थी। मन कर रहा था कि कहीं सोने के लिये कोई जगह मिल जाये पर, कहीं भी ऐसी कोई व्यवस्था न बनती देख, मैं और शिवांग धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे। सोच रहा था कि रात्रि में  केदारनाथ यात्रा का प्लान गलत हो गया है। मैं और शिवांग पूरे ट्रेक के दौरान साथ ही रहे थे। मैं जब बैठता था तब शिवांग भी बैठ जाता। यहां तक मैं और शिवांग पूरी तरह से थक चुके थे। पहली बार केदारनाथ की यात्रा पर जा रहे थे।

रामबाड़ा से लगभग 2 किलोमीटर तक छोटी लिंचोली तक ऊपर चढ़ने के बाद तक ट्रेक पर शायद ही कोई मिला हो। ट्रेक बिल्कुल  सुनसान था। मंदाकिनी घाटी से नदी की आवाज और भी डरा रही थी। कुछ दूर चलने के बाद एक अंकल आंटी और उनकी लड़की  ट्रेक पर मिले। अंकल जी बहुत ही घबराए हुए थे। अंकल की 60 के लगभग उम्र होती। कुछ देर बैठ के हम लोगों ने बात की अंकल जी साथ चलने का निवेदन बार बार करते रहे। लगभग  कुछ किलोमीटर हम लोग साथ ही चले। अंकल जी से बात करने पर पता चला कि उनके बहु और बेटे भी साथ आए हैं। पर उनकी नई -नई शादी हुई है। इसलिये हम लोगों को छोड़कर ऊपर कमरा देखने गए है। अंकल आंटी दिल्ली से आए थे। मेरे ख्याल से उनके बहु और बेटे को रात में ट्रेक पर छोड़ के जाना गलत था।  हम अंकल आंटी बड़ी लिनचोली तक साथ रहे। यहीं पर आंटी के बहु बेटे मिल गए। अंकल आंटी अपने टेंट में चले गए। अब हमारा अंकल आंटी का साथ खत्म हुआ। यहां से केदारनाथ अभी भी लगभग 5 ,6 किलोमीटर था। ठंड बहुत बढ़ गई थी। कोहरा भी बहुत था। कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। 3 बज गया था। यहां पर एक चाय की दुकान थी जो बंद हो चुकी थी। यहाँ पर आग जल रही थी। दुकान पर बैठकर हम लोगों ने अपने हाथ पैर गर्म किये। लगभग 2,3 घंटे तक आराम करने के बाद पुनः चलने का प्रोग्राम बनाया। अब थोड़ी दूर चलने के बाद चाय और बिस्कुट खाये थे। लगभग आधे घंटे बैठने के बाद फिर चल दिये। अब सुबह हो चुकी थी,हल्का दिन निकल आया था। खच्चर वालों ने चलना शुरू कर दिया था। थकान से बुरा हाल था।    
लगभग  एक किलोमीटर चलने के बाद मौसम बदलने लगा। पहाड़ के मौसम का मिजाज कब बदल जाये कुछ कहा नहीं जाता। आसमान में बादल मंडराने लगे थे।

मौसम बहुत खराब होने लगा था।  तेज बारिश के आसार थे। कुछ ही समय में बारिश शुरू हो गई। अब हम लोगों की परेशानी और बढ़ गई।  जल्दी से भागकर एक टीनशेड में पहुँचे। पर तब तक मैं और शिवांग पूरी तरह भीग चुके थे। आसमान में बहुत  बादल थे। बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। पहाड़ों पर बर्फ भी दिख रही थी। टेम्परेचर लगभग 1 डिग्री था। लगभग  घण्टे तक  टीनशेड में  रुकने के बाद विचार बनाया  की अब चला जाये बारिश कुछ हल्की हो गई थी। केदारनाथ अभी  भी 3 किलोमीटर था।हम दोनों पूरी तरह भीग चुके थे। लगभग 1 घंटे बाद  हम लोग केदारनाथ बेस कैम्प पहुँचे। यहाँ पर टेंट सुविधा थी।  तुरंत 500 रूपये देकर मैं और शिवांग टेंट में चले गए। बारिश अभी भी हो रही थी। टेंट में राजाई ओढ़कर सो गये। लगभग 2,3 घन्टे की नींद के बाद हम लोग उठे। फिर बाबा के दर्शन करने का प्लान बनाया।

अब मैं और  शिवांग बाबा के दर्शन के लिये जा रहे थे। प्राकृतिक सुंदरता को देख कर मैं बहुत ही अच्छा महसूस कर रहा था। पहाड़ों से लिपटी बर्फ बहुत ही शानदार लग रही थी। हवा में  ठंडक थी, केदारनाथ मंदिर अब सामने दिख रहा था। मैं और शिवांग प्रसाद लेकर मंदिर परिसर में पहुँच गए। यहां पर लाइन लगी थी। लगभग आधे घंटे बाद मंदिर में जाने को मिला था। फिर हम लोग मंदिर में केदारनाथ के दर्शन के लिये गए। कुछ ही समय में बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद लेकर हम लोग बाहर आ गए। फिर बाबा के धाम की परिक्रमा की।  लगभग एक घंटे हम लोग यहां रुके,खूब सारे फोटो क्लिक किये। वीडियो बनाई ऐसा लग रहा था बिल्कुल यही स्वर्ग है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता स्वर्ग सी अनुभूति करा रही थी। अगर स्वर्ग कहीं है तो बाबा केदारनाथ के चरणों में है,का भाव आ रहा था। 
फिर लगभग एक घंटे बाद हम लोग वापस टेंट में आ गए। रात में खाना खाकर सो गए। सुबह 6 बजे उठे। निर्णय हुआ कि अब नीचे गौरीकुंड चलते हैं।लगभग 1 बजे हम लोग गौरी कुंड आ गए।गाड़ी से सोनप्रयाग पहुँचने में 15 मिनट लगे थे। सोनप्रयाग से  रूद्रप्रयाग तक एक टैक्सी मिल गई। तुरंत हम लोग टैक्सी में बैठकर रुद्रप्रयाग तक पहुँच गए। फिर रुद्रप्रयाग से हम लोग बस से श्रीनगर तक गए। अब रात के 9 बज गए थे। रात में श्रीनगर गुरुद्वारा में रुके। सुबह उठकर  6 बजे बस में बैठकर 11 बजे तक ऋषिकेश पहुँच गए। फिर हम लोग ऋषिकेश से ट्रेन से हरिद्वार तक आए। मनसा देवी पॉइंट के पास ट्रेन रुकी और हम लोग वही पर उतरकर हर की पौड़ी घाट के लिये चल दिये। गर्मी बहुत हो रही थी। घाट पर पहुँच कर 1 घंटे तक गंगा स्नान किया। उसके बाद एक होटल में खाना खाकर  हम लोग रेलवे स्टेशन  आ गए। दून एक्सप्रेस आने वाली थी। ट्रेन में बैठकर आराम से हम लोग शाहजहाँपुर आ गए। इस तरह हमारी केदारनाथ की यात्रा का समापन हुआ।

जय श्री केदारनाथ
                      शिवांग और सूूरज

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